बीएचयू के शोधार्थियों की ओर से 200 से ज्यादा रॉक आर्ट्स और रॉक शेल्टर पर लिखी किताब का नई दिल्ली में लोकार्पण किया गया। लद्दाख से लेकर केरल की शैल कलाओं की सचित्र और डिटेल जानकारी पुस्तक शैलचित्र विरासत को समझना: एक अंतःविषयक वैज्ञानिक दृष्टिकोण में मिलेगी।
इसमें लद्दाख की लुब्रा घाटी से लेकर केरल तक के रहस्यमयी शैलाश्रयों का गहन अध्ययन किया गया है। इस किताब में सोनभद्र के कौवा खोह को अब तक ज्ञात सबसे लंबा चित्रित शैलाश्रय बताया गया है। इसकी लंबाई 120 मीटर है और इस पर 10 हजार साल पहले के चित्र उकेरे गए थे।
वहीं, मध्य प्रदेश के भीमबैठका में 40 हजार साल पुरानी चित्रकला मिलने का दावा किया गया है। अब तक वहां का प्रमाण 25 हजार साल पुराना ही था। मध्य प्रदेश में भीमबैठका की चित्रकला 40 हजार साल पुरानी शिक्षा मंत्रालय ने कराया तैयार।
शिक्षा मंत्रालय के आईकेएस प्रभाग की ओर से फंडेड प्रोजेक्ट के तहत इस किताब को तैयार किया गया है। बीएचयू के आर्कियोलॉजिस्ट डॉ. सचिन तिवारी प्रोजेक्ट लीडर, उनकी रिसर्च स्कॉलर नीलम सिंह और आईआईटी-बीएचयू के रसायन शास्त्री डॉ. वी रामनाथन ने मिलकर ये किताब तैयार की है।
डॉ. तिवारी ने कहा कि इस किताब के फैक्ट को न केवल विद्वान और शोधार्थी बल्कि आम आदमी भी आसानी से समझ सकता है। विख्यात आर्कियोलॉजिस्ट प्रो. वसंत शिंदे और आईआईटी बीएचयू के डायरेक्टर प्रो. अमित पात्रा ने इस किताब की भूमिका लिखी है।