कमिश्नरेट के डायल 112 के पास बीते छह माह में सर्वाधिक शिकायतें प्रयागराज के महाकुंभ के पलट प्रवाह के दौरान फरवरी में आईं। इसमें खास बात यह रही कि रोजाना लाखों श्रद्धालुओं के काशी आने के कारण ट्रैफिक के भारी दबाव के बीच फरवरी में ही डायल 112 का सबसे अच्छा रिस्पांस टाइम भी रहा।
फरवरी के 28 दिनों में 17901 लोगों ने 112 नंबर पर फोन किया। प्रत्येक शिकायतकर्ता के पास पुलिस को पहुंचने में औसतन महज 5 मिनट 43 सेकेंड का समय लगा। आपातकालीन टेलीफोन नंबर 112 आम आदमी के लिए बहुत उपयोगी है। मौजूदा समय में कमिश्नरेट की पुलिस के डायल 112 के बेड़े में 59 दोपहिया और 64 चारपहिया वाहन हैं।
इनमें से एक चार पहिया वाहन ऐसा है, जिसमें 360 डिग्री घूम कर फोटो-वीडियो ले सकना वाला कैमरा लगा है। सितंबर 2024 से जनवरी 2025 तक के पांच महीनों में कमिश्नरेट के डायल 112 के पुलिस रिस्पांस व्हीकल (पीआरवी) का सबसे अच्छा रिस्पांस टाइम 6 मिनट 9 सेकेंड था।
यह रिस्पांस टाइम जनवरी का था। फरवरी में डायल 112 की पीआरवी शिकायतकर्ता के पास शहरी क्षेत्र में 5 मिनट 39 सेकेंड और ग्रामीण क्षेत्र में 5 मिनट 48 सेकेंड में पहुंची। इस तरह से फरवरी का डायल 112 का औसत रिस्पांस टाइम 5 मिनट 43 सेकेंड का रहा।
इसी तरह से शिकायतों को देखें तो सितंबर 2024 से जनवरी 2025 तक के पांच महीनों में डायल 112 के पास सर्वाधिक 16384 कॉल अक्तूबर में आई। फरवरी 2025 में यह आंकड़ा 17901 शिकायतों तक पहुंच गया।
शहर में दोपहिया और हाईवे पर चारपहिया पीआरवी थी
एडीसीपी काशी जोन सरवणन टी ने बताया कि महाकुंभ के पलट प्रवाह को देखते हुए डायल 112 की पीआरवी के गश्त क्षेत्र में हमने बदलाव किया था। ट्रैफिक का भारी दबाव देख कर शहर में दोपहिया पीआरवी को रखा गया। काशी की ओर आने वाले सभी प्रमुख मार्गों व उनके आसपास चारपहिया पीआरवी को रखा गया।
काशी में बाहर से आए श्रद्धालुओं की सबसे ज्यादा कॉल ट्रैफिक से संबंधित या प्राथमिक उपचार या अस्पताल पहुंचाने या फिर अपनों से बिछड़ जाने की रहती थी। पीआरवी को रि-लोकेट किए जाने का फायदा हमें मिला और रिस्पांस टाइम में अच्छा सुधार आया।
महिलाएं रात में अकेले फंसें तो 112 पर कॉल करें
एडीसीपी काशी जोन ने कहा कि महिलाएं यदि रात में कहीं अकेले फंस जाए। उन्हें आवागमन का कोई साधन न मिल रहा हो। ऐसे में वह नि:संकोच 112 नंबर पर फोन करें। हमारी पीआरवी के पुलिस कर्मी तत्परता से ऐसी महिलाओं की मदद कर उन्हें सुरक्षित स्थान तक पहुंचाते हैं।