फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

कफ सिरप कांड: विकास दुबे की तरह ही विकास नरवे ने भी मंदिरों में टेका मत्था, 45 दिनों तक 14 घंटे रहा रडार पर

Thu, 29 Jan 2026 06:12 AM IST
अमन विश्वकर्मा अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी।

सार

Cough Syrup: कफ सिरप मामले का आरोपी अमित सिंह 'टाटा' और बर्खास्त सिपाही आलोक सिंह पर हुई एसटीएफ की कार्रवाई से नरवे घबराया था। फेंसिडिल से कमाई काली रकम खपाने में जुटा था। अंकित और आकाश लगातार उसके साथ रहे।
विज्ञापन
गिरफ्तार आरोपी विकास सिंह (फाइल फोटो) - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

Varanasi News: कुख्यात अपराधी रहे विकास दुबे की तर्ज पर ही कफ सिरप तस्करी के बड़े आरोपी विकास सिंह नरवे ने भी फरारी के दौरान मंदिरों की शरण ली। विकास सिंह एक-दो नहीं बल्कि एक दर्जन से अधिक मंदिरों में मत्था टेकता रहा और उन्हीं मंदिर परिसरों व आसपास के इलाकों को ठिकाना बनाकर पुलिस को चकमा देता रहा। जब तक लोकेशन ट्रेस होती वह ठिकाना बदल देता था। एसआईटी की टीम 45 दिनों तक 14 घंटे लगातार सर्विलांस पर सक्रिय रही। 

विज्ञापन


इस बीच सटीक लोकेशन पर उसे सिद्धार्थनगर से पकड़ा। फरारी के दौरान उसने सात दिनों के अंदर दो बार नेपाल भागने की कोशिश की। दबाव बढ़ता देख उसने अपने खास सहयोगी अंकित श्रीवास्तव जो विकास का पूरा काम देखता था उसे भी बुला लिया था साथ में आकाश पाठक को भी। यहां से तीनों नेपाल के रास्ते दुबई भागने के फिराक में थे।

अमित सिंह टाटा और आलोक सिंह की गिरफ्तारी के बाद विकास सिंह नरवे, अंकित और आकाश घबरा गए थए। गिरफ्तारी से ज्यादा काली कमाई जाने का डर से तीनों को सताने लगा, फरारी के दौरान फेंसेडिल कफ सिरप की अवैध बिक्री से अर्जित काली कमाई को ठिकाने लगाने की योजना में लगे थे। 
विज्ञापन


जांच में सामने आया कि कफ सिरप नेटवर्क में भूमिका स्पष्ट रूप से बंटी हुई थी। जहां मुख्य आरोपी शुभम का संरक्षक अमित सिंह टाटा और आलोक सिंह था, वहीं गैंग से जुड़े अन्य कई सदस्यों को विकास सिंह नरवे संरक्षण दे रहा था। एसआईटी प्रमुख सरवणन टी ने बताया कि विकास सिंह नरवे पूरी तरह अंडरग्राउंड हो गया। इस दौरान उसने काली कमाई को कहा और कैसे लगाना है इस पर मंथन करता रहा।

कॉल डिटेल रिकॉर्ड, टावर लोकेशन और तकनीकी इनपुट से पकड़े गए तीनों
विकास सिंह तक पहुंचने के लिए एसआईटी ने सतर्कता दिखाई। टीम लगातार 45 दिनों तक, रोज 14 घंटे सर्विलांस पर एसआईटी उसे ट्रेस करती रहीं। कॉल डिटेल रिकॉर्ड, टावर लोकेशन और तकनीकी इनपुट खंगाले गए। सात दिन पहले उसका लॉस्ट लोकेशन सिद्धार्थनगर में मिला। एसआईटी की पूछताछ में उसके संपर्कों, फंडिंग और राजनीतिक कनेक्शन की जांच की गई।

आईपीएल बेटिंग में साथियों के साथ लगाई मोटी रकम
कफ सिरप के अवैध कारोबार से अर्जित करोड़ों की कमाई को आईपीएल सट्टेबाजी में लगाने का खुलासा हुआ है। जांच एजेंसियों के अनुसार इस पूरे नेटवर्क का अहम किरदार विकास नरवे रहा है, जो पहले भी इसी मामले में जेल जा चुका है। कफ सिरप मामले में बांग्लादेश से नकद में व्यापार होता था। हवाला के तहत पैसा कोलकाता, झारखंड और बिहार के रास्ते बनारस पहुंचता था। महीने में दो बार शुभम से तीनों की मीटिंग होती थी।

इसे भी पढ़ें; UP: अपने मठ पहुंचे स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद, आज हो सकते हैं मीडिया से मुखातिब; भेलूपुर पुलिस सतर्क
विज्ञापन

दुबई में बैठे शुभम को कुर्की का नहीं डर,करोड़ों रुपये संरक्षित करने की चिंता
दुबई में रह रहा शुभम फिलहाल भारत लौटने से बच रहा है। जांच कर रही टीम के अनुसार वह जानता है कि पुलिस की गिरफ्त में आते ही पूरे मामले की परतें खुल सकती हैं। शुभम करोड़ों रुपये की रकम को इधर-उधर खपाने में लगा हुआ है। वह विदेश में बैठकर अपने लोगों के साथ ये काम कर रहा है।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें