स्वास्थ्य विभाग की मेडिकल बुलेटिन में हर दिन 15 साल से कम उम्र वाले दो से तीन केस मिल रहे हैं। 26 अप्रैल को भी 10 और 11 साल के दो बच्चों में संक्रमण की पुष्टि हुई है। इसमें एक बच्चे को 25 अप्रैल को बीएचयू में भर्ती करना पड़ा।
बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. अशोक कुमार राय ने कहा कि कोरोना का संक्रमण जिस तरह से बढ़ रहा है, उससे बचाव का कोविड प्रोटोकॉल ही एक मात्र उपाय है। घर में अगर छोटे बच्चे हैं तो उन्हें भीड़भाड़ वाली जगह पर ले जाने से बचना चाहिए। खांसी, बुखार या पेट संबंधी बीमारी हो तो तुरंत जांच करानी चाहिए। यह भी कोविड के लक्षण है।
कोरोना के बढ़ते संक्रमण को देखते हुए अस्पतालों में सतर्कता बढ़ा दी गई है। बीएचयू सर सुंदरलाल अस्पताल के बाद अब ट्रॉमा सेंटर में भी मास्क अनिवार्य कर दिया गया है। मरीजों और तीमारदारों को कोविड प्रोटोकॉल का पालन करना अनिवार्य होगा। ट्रॉमा सेंटर में केवल वाराणसी और आसपास ही नहीं बल्कि बिहार, झारखंड के भी लोग इलाज के लिए आते हैं। सभी जगहों पर कोरोना के मामले बढ़ रहे हैं।
इसे देखते हुए ओपीडी, इमरजेंसी सहित सभी जगहों पर कोविड प्रोटोकॉल का पालन अनिवार्य कर दिया गया है। ट्रॉमा सेंटर के प्रोफेसर इंचार्ज प्रो. सौरभ सिंह ने बताया कि थोड़ी सी सतर्कता से हम खुद को ही नहीं बल्कि आसपास के लोगों को संक्रमण से बचा सकते हैं। इसके लिए मास्क लगाना, बार-बार हाथ धोना और दो गज की दूरी का पालन करना जरूरी है।