वाराणसी आए कोलकाता विश्वविद्यालय के सहायक प्रोफेसर डॉ. राकेश तमांग ने कहा कि बड़ी सामाजिक सभाओं ने कोविड-19 को फैलने में मदद की। अमृता विश्वविद्यापीठम केरल में एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. प्रशांत सुरवझाला ने कहा कि हमारे वैज्ञानिक निष्कर्ष वेरिएंट के प्रसार और बड़ी सभाओं से जुड़े लोगों को संक्रमण के अधिक जोखिम को दर्शाते हैं।
जाह्नवी पारासर ने कहा कि उत्तर भारत में अल्फा वेरिएंट प्रमुख रूप से उपस्थित था। इस वेरिएंट की कई फाउडिंग शाखाएं देखी गईं। भारत में अल्फा वेरिएंट का प्रसार प्रमुख रूप से दिल्ली, चंडीगढ़ और पंजाब के राज्यों में था, जहां इसकी 44 जेनेटिक शाखाएं मौजूद थीं। तीन शाखाओं को छोड़कर भारत में अल्फा वेरिएंट की सभी 44 शाखाएं दिल्ली, पंजाब और चंडीगढ़ में मौजूद थीं।
प्रो. चौबे ने बताया कि सामूहिक सभाएं मानवजनित रोगों के फैलने में मदद करती हैं। 2009 की महामारी इन्फ्लूएंजा या मिडिल ईस्ट रेस्पिरेटरी सिंड्रोम से संबंधित कोरोना वायरस और 2013 में मिडिल ईस्ट रेस्पिरेटरी सिंड्रोम का प्रकोप इसके उदाहरण हैं। हालांकि, बीमारी के संचरण और प्रसार में इस तरह की सामूहिक सभाओं की सटीक भूमिका का पूरी तरह से आकलन वैज्ञानिक रूप से नहीं हो पाया था।