आवाज देने पर भी शादाब ने दरवाजा नहीं खोला। दीवार फांदकर शादाब भाग गया। तहरीर के आधार पर पुलिस ने हत्या व आर्म्स एक्ट के तहत केस दर्ज कर विवेचना की। विवेचक ने पर्याप्त सबूत मिलने पर कोर्ट में शादाब अंसारी के विरुद्ध चार्जशीट दाखिल किया।
मामले की सुनवाई करते हुए अदालत ने दोनों पक्षों के अधिवक्ताओं के तर्कों को सुनने, आठ गवाहों के बयान व पत्रावली का अवलोकन के बाद शादाब अंसारी को दोषी पाया। पत्रावली का अवलोकन करने पर दोषी शादाब अंसारी को आजीवन कारावास और 25 हजार रुपये अर्थदण्ड की सजा सुनाई।
साथ ही अर्थदंड नहीं देने पर चार माह की अतिरिक्त कैद भुगतनी पड़ेगी। जेल में बिताई गई अवधि सजा में समाहित होगी। आजीवन कारावास की अवधि दोषसिद्ध अभियुक्त के शेष संपूर्ण जीवन तक रहेगी। अभियोजन पक्ष की ओर से सरकारी वकील विनोद कुमार पाठक ने बहस की।