प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की नोटबंदी की घोषणा के 50 दिन बुधवार को पूरे हो गए लेकिन अभी तक पूरी तरह से गाड़ी पटरी पर नहीं आ पाई है। शहर में हालांकि बैंकों के अलावा एटीएम से कैश मिलने की स्थिति बेहतर हुई है लेकिन गांवों में अब भी हालात पहले जैसे बने हुए हैं। सबसे अधिक दिक्कत ग्रामीण बैंक शाखाओं पर है। जहां अब भी आए दिन लंबे इंतजार के बाद लोगांे को मायूस लौटना पड़ रहा है। ग्रामीण आैर शहरी क्षेत्रों के कई एटीएम अब तक कैलिब्रेट नहीं हो पाए हैं। अधिकतर एटीएम से दो-दो हजार के नोट निकलने के कारण अब कैश से कहीं ज्यादा दिक्कत फुटकर के लिए है। हालात ऐसे हैं कि फुटकर नोट मांगने पर बैंकों की ओर से ग्राहकों को दस-दस के सिक्के बांटे जा रहे हैं।
आठ नवंबर से 500-1000 के पुराने नोटों के चलन से बाहर होने के बाद शहर में स्थितियां पहले से बेहतर हुई हैं लेकिन चेक और एटीएम से कैश निकालने की लिमिट अब तक न बढ़ाए जाने से लोग परेश्ाान हैं। हालांकि पीएम के आगमन के मद्देनजर 16 दिसंबर को 2700 करोड़ और उसके बाद 23 दिसंबर को 200 करोड़ रुपये आरबीआई ने भेजे। इसके बाद कुछ दिन तक बैंक-एटीएम पर हालत सामान्य दिखे लेकिन अब फिर पहले की तरह समस्या शुरू हो गई हैं। ग्रामीण इलाकों से लोग बिना कैश लौट रहे हैं तो वहीं एटीएम से 500 और 100 रुपये के नोट न मिलने से भी निराशा हो रही है। तीस दिसंबर के पहले आरबीआई की ओर से नई करेंसी मिलने की संभावना नहीं दिख रही है, ऐसे में बैंकर्स भी परेशान है कि वह स्थिति कैसे संभालें। कैशलेस व्यवस्था अब भी बड़े शोरूम और कुछ दूकानों तक है। हालांकि आम लोगांे में कैशलेस के प्रति जागरूकता के प्रयासों में तेजी आई है।