प्रो. विनीता गुप्ता का कहना है कि थैलेसीमिया ग्रसित बच्चों का अगर ट्रांसप्लांट कर दिया जाए तो उनकी बीमारी खत्म हो जाती है। इसके पहले ब्लड मैचिंग (परिवार के सदस्यों से ब्लड ग्रुप की मैचिंग) कराई जाती है। आम तौर पर बच्चे को उसके भाई-बहन का ही खून मिल पाता है। समय-समय पर कैंप लगाकर ऐसे बच्चों की जांच भी कराई जाती है। इसे एचएलए यानी ह्यूमन लिकोसाइड एंटीजन कहा जाता है।