पशु चिकित्सा अधिकारी ने बताया कि जिले में कुल 121 पशु आश्रय स्थल हैं। इसमें 10 हजार से ज्यादा गोवंश हैं। कंट्रोल रूम में आने वाली शिकायतों के बाद इनकी संख्या बढ़ने पर और गो आश्रयों के लिए प्रशासन को पत्र लिखा जाएगा।
जिले में छुट्टा पशुओं की संख्या लगातार बढ़ रही है। किसान की फसलों को छुट्टा पशु नुकसान पहुंचा रहे हैं। इससे परेशान होकर कई किसानों ने खेती करना छोड़ दिया। किसानों की समस्या को देखते हुए प्रदेश के कई जिलों में कंट्रोल और समन्यवक तैनात किए गए, लेकिन वाराणसी में इस तरह की कोई व्यवस्था नहीं की गई थी। इसकी खबर छह फरवरी को अमर उजाला में प्रमुखता से प्रकाशित की गई। इसके तीन बाद प्रशासन की नींद टूटी। बुधवार को मुख्य विकास अधिकारी अभिषेक गोयल ने छुट्टा पशुओं को गो आश्रय में संरक्षित कराए जाने के लिए विकास भवन में कंट्रोल रूम की स्थापना की है।