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कोरोना काल में भूले बच्चों का सामान्य टीकाकरण

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कोरोना की संभावित तीसरी लहर में बच्चों में संक्रमण की संभावना जताई जा रही है। स्वास्थ्य विभाग केवल कोरोना टीकाकरण पर ध्यान दे रहा है। ऐसे में बच्चों के नियमित टीकाकरण पर ग्रहण लगा हुआ है। अप्रैल 2021 से मार्च 2022 तक जिले में पांच साल तक के 1,07,720 बच्चों को टीका लगाने का लक्ष्य रखा गया है। लेकिन अब तक चार महीने में केवल 20 हजार बच्चों को ही टीका लग सका है। तय समय तक बच्चों को टीका नहीं लगाया गया तो समस्या बढ़ सकती है। बच्चों को जन्म के समय से लेकर पांच साल तक बीसीजी, हेपेटाइटिस बी, रोटा वायरस, पोलियो के टीके लगाए जाते हैं। इससे टीबी, निमोनिया, हेपेटाइटिस, पोलियो, काली खांसी, गला घोंटू, डायरिया आदि बीमारियों से बच्चों की रक्षा होती है। इसके लिए मिशन इंद्रधनुष अभियान भी चलाया जाता है, लेकिन पहले कोरोना संक्रमण और अब टीकाकरण में आशा, एएनएम के लगाए जाने पर नियमित टीकाकरण प्रभावित हो रहा है। तीसरी लहर को ध्यान में रख विशेष अभियान के तहत बच्चों का टीका लगाया जाना है, ताकि उन्हें बीमारियों से बचाया जा सके। अब टीकाकरण का लक्ष्य पूरा करने के लिए स्वास्थ्य विभाग की ओर से नए सिरे से रणनीति बनाई जा रही है।
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तीन दिन चलेगा अभियान
स्वास्थ्य विभाग की ओर से लक्ष्य पूरा करने के लिए अब सप्ताह में तीन दिन अभियान चलाने का निर्णय लिया गया है। सीएमओ डॉ. वीबी सिंह ने बताया कि इसके लिए शहरी और ग्रामीण इलाकों के ऐसे केंद्र जहां कोरोना टीकाकरण नहीं हो रहा है, वहां नियमित टीकाकरण बूथ बनाकर तीन दिन टीके लगाए जाएंगे। इसके अलावा आशा, एएनएम को डोर टू डोर टीका लगाने का भी निर्देश दिया गया है।
बच्चों को बीमारियों से बचाव के लिए नियमित टीकाकरण बहुत जरूरी है। अभिभावकों को भी जागरूक किया जा रहा है। जिस तरह से तीसरी लहर की संभावना जताई जा रही है, उससे पहले अगर अधिक से अधिक बच्चों का टीकाकरण हो गया तो उन्हें संक्रमण से भी बचाया जा सकता है।
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- डॉ. सीपी गुप्ता, बाल रोग विशेषज्ञ, मंडलीय अस्पताल
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