मानसिक रोग विशेषज्ञ डॉ. प्रदीप चौरसिया ने बताया कि ऑनलाइन गेम की लत लगने और फिर उसके चलते ऑनलाइन जुए में फंसने के कई मामले आ चुके हैं। अभी भी आ रहे हैं। ऑनलाइन गेमिंग का रिवॉर्ड सिस्टम और सोशल कनेक्शन दिमाग में डोपामिन रिलीज करता है। इससे ऑनलाइन गेमिंग खेलने की और इच्छा बढ़ जाती है इसीलिए अगर उन्हें कोई गेम खेलने से मना करता या काफी देर तक अचानक उन्हें गेम से अलग रहना पड़े तो वह चिड़चिड़े और गुस्सैल हो जाते हैं। ऑनलाइन गेमिंग एडिक्शन की वजह से युवाओं में तनाव और काम के प्रति लगाव कम हो जाता है।
केस-1: गेम में गंवा दिए 40 लाख
छित्तूपुर क्षेत्र के एक परिवार का लड़का ऑनलाइन गेम में फंसा। धीरे–धीरे यही आदत ऑनलाइन जुए तक ले गई। घर से कुछ ज्वेलरी और बाहर से कर्ज लेकर सबकुछ जुए में हार गया। बाहर के कर्जदारों का जब पैसा नहीं मिला तो उन्होंने परिवार से संपर्क करना शुरू किया। परिवार ने शहर में ही एक प्लाट बेचकर उसका कर्ज भरा। लड़के की करीब 3 महीने काउंसलिंग चली।
केस-2: ऑनलाइन गेम में फंसा, फिर जुए में हार गया 75 लाख
मऊ का एक लड़का पहले गेम खेलता था, फिर उसने ऑनलाइन गेम खेलना शुरू किया। इसी के साथ उसे गेम के ही जरिये जुए की लत लग गई। पिता सरकारी नौकरी में अच्छे पद पर थे। धीरे–धीरे करीब एक साल में उसने कर्ज लेकर करीब 75 लाख रुपये जुए में गंवा दिए। कर्जदार घर आने लगे तो, मामला खुल कर सामने आया। पिता को प्लाट बेचकर कर्ज चुकाना पड़ा है।
केस-3: 50 लाख गंवाए तब परिवार को पता चला
कुछ दिनों पहले काशी में बिहार के कैमूर से एक केस आया। रईस परिवार से ताल्लुक रखने वाले एक लड़के को ऑनलाइन गेम की ऐसी लत लगी की वह जुआ खेलने लगा। बाहर से कर्ज लेता गया और करीब 50 लाख जुए में हार गया। एक रिश्तेदार के माध्यम से परिवार को इस बात का पता चला तो उसका जुआ छुड़ाया गया। उसके बाद करीब 6 महीने तक उसकी काउंसलिंग हुई।