चेतावनी दी कि भविष्य में ऐसा करने पर बिल्कुल बख्शा नहीं जाएगा। यही नहीं पिता से लिखित आश्वासन लिया कि आज के बाद ऐसी गलती उनकी ओर से नहीं होगी। न्यायिक सदस्य राजू सिंह ने बताया कि कोई व्यक्ति अथवा अभिभावक यदि अपने बच्चे को मारता-पीटता है, हमला करता है, परित्याग करता है, उत्पीड़न करता है, जानबूझकर उपेक्षा करता है, बच्चे को शारीरिक व मानसिक कष्ट देता है तो उसके खिलाफ किशोर न्याय अधिनियम के तहत सजा मिलेगी।