धरती पर खुशहाली के लिए दुआ मांगते हैं और जीवन में सौभाग्य पाने के लिए देवता को धन्यवाद देते हैं। वे सूर्य देव, उनकी पत्नी उषा देवी और प्रत्यूषा की पूजा-अर्चना करते हैं। षष्ठी देवी ब्रह्माजी की मानस पुत्री हैं। त्रिनिदाद और टोबैगो, जमैका, गुयाना, अरूबा, बारबाडोस, सूरीनाम, फिजी, मॉरीशस औपनिवेशिक देश थे। यहां भारतीय परंपराएं और संस्कृति आज भी समृद्ध है।
त्रिनिदाद में छठ पूजा की लोकप्रियता बढ़ रही है, इसका अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि पहली बार ही आयोजन में बड़े पैमाने पर आस्था देखने को मिली। यहां की 20 प्रतिशत आबादी यूपी और बिहार से आती है। उनके पूर्वज भारत से अप्रवासी के रूप में आए थे और कई ने राजनीति, विज्ञान, शिक्षा, कानून और इंजीनियरिंग जैसे कई क्षेत्रों में महत्वपूर्ण स्थान बनाया। बताया कि भक्तों ने पूजा करने के लिए गैस्पारिलो, त्रिनिदाद और टोबैगो, वेस्ट इंडीज में स्थित आश्रम पहुंचकर विधान की जानकारी ली।