बीएचयू के कुलपति प्रो. सुधीर कुमार जैन ने कहा कि बीएचयू और उत्तर प्रदेश सरकार यदि स्वास्थ्य के क्षेत्र में मिलकर कार्य करें तो इसका ऐतिहासिक परिणाम मिल सकता है। आवश्यकता है कि आयुर्वेद के छात्र तकनीकी स्तर को बढ़ाकर नए-नए शोध कार्यों को करें।
कार्यक्रम संयोजक प्रो. यामिनी भूषण त्रिपाठी ने बताया कि वाराणसी और मिर्जापुर मंडल में किसानों, सामाजिक कार्यकर्ताओं में दो लाख गिलोय के पौधों का वितरण किया जा चुका है। बीएचयू के कुलगुरु प्रो. वीके शुक्ल ने भी गिलोय मिशन को जनोपयोगी बताया। आयोजन सचिव वैद्य सुशील कुमार दुबे ने बेहतर स्वास्थ्य के लिए आयुर्वेद की उपयोगिता की विस्तार से जानकारी दी।
कार्यक्रम का संचालन प्रोफेसर नम्रता जोशी और डॉ देवानंद उपाध्याय, जबकि धन्यवाद ज्ञापन प्रोफेसर पीके गोस्वामी ने दिया। इस दौरान अखिल भारतीय गोसेवा प्रमुख अजीत महापात्र, विशिष्ट अतिथि मंडलायुक्त वाराणसी दीपक अग्रवाल, संयुक्त निदेशक पंचायती राज अशोक कुमार साही, आयुष निदेशक प्रोफेसर एसएन सिंह, प्रोफेसर संगीता गहलोत आदि लोग मौजूद रहे।
प्रदेश के मुख्य सचिव दुर्गाशंकर मिश्र ने बीएचयू वैदिक विज्ञान केंद्र का निरीक्षण कर केंद्र संचालन समिति के सदस्यों और सलाहकार मंडल के सदस्यों के साथ केंद्र के विकास एवं वैदिक विज्ञान को जनोपयोगी बनाने हेतु चर्चा की। वैदिक विज्ञान परंपरा के उन तथ्यों के अध्ययन पर बल देना जरूरी है, जिसे जनसाधारण आसानी से समझ सके एवं उनका जीवकोपार्जन में उपयोग कर सकें। केंद्र समन्वयक प्रो. उपेंद्र कुमार त्रिपाठी ने केंद्र में चलने वाली गतिविधियों के बारे में विस्तार से बताया।