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काशी संवाद 2025: अनुप्रिया पटेल बोलीं- पहले कभी हेल्थ केयर में सिर्फ ढांचे ही मिलते थे, अब इलाज-जांच फ्री

Fri, 21 Nov 2025 04:30 PM IST
प्रगति चंद अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी।

सार

Varanasi News: काशी संवाद 2025 में मुख्य सचिव अवनीश अवस्थी और केंद्रीय मंत्री अनुप्रिया पटेल ने संबोधित किया। इस दौरान मुख्य सचिव ने कहा कि आप छात्र मजबूत होंगे तभी देश आगे बढ़ेगा। वहीं अनुप्रिया पटेल ने कहा कि ग्लोबल वार्मिंग में अपने कमिटमेंट्स को पूरा करने वाला सबसे बेहतर देश भारत बन गया है।
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संबोधित करतीं मंत्री अनुप्रिया पटेल - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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बीएचयू के मालवीय मूल्य अनुशीलन केंद्र में शुक्रवार को काशी संवाद 2025 कार्यक्रम में केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण राज्यमंत्री अनुप्रिया पटेल ने कहा कि काशी विकास और विरासत दोनों का उभरता मॉडल है। लगातार सरकार की कोशिश रही कि भारत की आर्थिक प्रगति और पर्यावरण के बीच संतुलन बना रहे। उन्होंने पुरानी सरकारों पर निशाना साधते हुए कहा कि पहले तो हेल्थकेयर के सिर्फ ढांचे ही मिलते थे, सुविधाएं नहीं। लेकिन, अब करोड़ों लोगों को आयुष्मान से निशुल्क इलाज, जांच और दवा के साथ ही अत्याधुनिक सुविधा दी जा रही है।

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उन्होंने कहा कि देश के हर तबके तक कैसे पहुंचना है, ये सोच हमारी सरकार ने दिखाई। देश का बड़ा वर्ग जो आजादी के 75 साल बाद भी अपनी चुनौतियों से जूझ रहा है, ऐसे में विकसित भारत तभी होगा जब सरकार वंचित लोगों के लिए काम करे।

सीआईआई और बीएचयू की ओर से आयोजित इस दो दिवसीय कार्यक्रम में मंत्री अनुप्रिया पटेल ने कहा कि हेल्थ केयर में जीडीपी का 2.5 फीसदी हिस्सा होगा। 11 वर्षों में यूनिवर्सल हेल्थ कवरेज भारत की प्राथमिकता में है। इसके लिए सारे जरूरी काम किए गए हैं। हेल्थकेयर बजट को बढ़ाया गया है। इस बार एक लाख करोड़ रुपये और जीडीपी का 2.5 फीसदी स्वास्थ्य पर खर्च किया जाएगा। वर्तमान में ये दो फीसदी है।

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ग्लोबल वार्मिंग कम करने पर दुनिया कर रही तारीफ

मंत्री अनुप्रिया पटेल ने सीआईआई के चार स्तंभ बताए। नवाचार, समानता, समावेशन और स्थिरता। कहा कि ये चारों पिछले एक दशक में भारत के शासन मॉडल के मूल्यों से गहराई से जुड़े हैं। अनुप्रिया पटेल ने कहा कि 2070 तक भारत का कार्बन उत्सर्जन नेट जीरो और 2030 तक 50 प्रतिशत ऊर्जा खपत कम होगा। ग्लोबल वार्मिंग में भारत वह देश है जो अपने दावों को पूरा कर रहा है। इसकी दुनिया भर में तारीफ हो रही है। सरकार तो प्रयास कर रही है लेकिन हम सबको अपना अपना योगदान देना होगा।

कुलपति प्रो. अजित कुमार चतुर्वेदी ने कहा कि भारत में प्रौद्योगिकी, अर्थव्यवस्था, साक्षरता और स्वास्थ्य जैसे विभिन्न क्षेत्रों में हो रही तेज प्रगति जैसी उपलब्धियां नई चुनौतियां भी लाती हैं। समानता, सामाजिक समावेशन, नवाचार के अवसरों तक पहुंच के लिए बाजार संपर्क सुनिश्चित करना होगा।

समाज कल्याण विभाग के राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) असीम अरुण ने सीएसआर फंड पर सुझाव दिया कि इसका उपयोग पायलट प्रोजेक्ट्स के लिए किया जाए, ताकि सरकारी मानकों को और बेहतर बनाया जा सके। आगे कहा कि शैक्षणिक संस्थान समाज को जिस दिशा में मार्गदर्शन दे सकते हैं, वह किसी अन्य संस्था के लिए संभव नहीं है।

मोबाइल-सोशल मीडिया पर ही रहने वाले कभी आगे नहीं होंगे

पूर्व मुख्य सचिव अवनीश अवस्थी - फोटो : अमर उजाला
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के मुख्य सलाहकार और पूर्व मुख्य सचिव अवनीश अवस्थी ने कहा कि युवा मोबाइल और सोशल मीडिया पर ही रहेगा तो कभी आगे नहीं बढ़ पाएगा। युवाओं से सीखने के परिणामों में सुधार, सततता को अपनाने और नवाचार को बढ़ावा देने की दिशा में सक्रिय योगदान देने का आह्वान किया। कहा कि बीएचयू जैसे संस्थानों को जल संरक्षण, कचरा प्रबंधन, सौर ऊर्जा उपयोग और कृषि तथा जलवायु संबंधी चुनौतियों के लिए अनुसंधान आधारित समाधानों में आदर्श प्रस्तुत करना चाहिए। बायो गैस के मामले में यूपी पहले और पीएम सोलर में चौथे स्थान पर हैं। आईआईटी बीएचयू और आईआईटी कानपुर दो एक्सीलेंस सेंटर के तौर पर काम कर रहे हैं। हमारा बच्चा ढाई साल में स्कूल जा रहा लेकिन गांवों में छह साल में जा रहा है। यह ठीक नहीं है। बाल वाटिका खुले हैं जिसमें बच्चे तीन साल की उम्र में जाकर पढ़ाई कर सकते हैं।
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फंड्स के खर्च करने का तरीका अभी भी पारंपरिक
सीआईआई राष्ट्रीय सीएसआर समिति के अध्यक्ष बी. थियागराजन, सीआईआई, उत्तर प्रदेश की चेयर, डॉ. उपासना अरोड़ा, को-चेयर इस्मिता अग्रवाल आदि ने कहा कि विकास तभी सार्थक और पूर्ण माना जाएगा जब उसमें भागीदारी के साथ संवेदना भी शामिल हो। सीआईआई वाराणसी के उमंग शाह ने कहा कि कंपनियों की संख्या लगातार बढ़ रही है। फंड्स के खर्च करने का तरीका अभी भी पारंपरिक है, जिसमें बदलाव की जरूरत है।
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