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Varanasi: किसानों से बोले सीएम योगी- गौ आधारित प्राकृतिक खेती की ओर लौटें, धरती माता के साथ खिलवाड़ गलत

Sun, 08 Jan 2023 10:31 PM IST
उत्पल कांत न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी

सार

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ रविवार को वाराणसी पहुंचे। बीएचयू मेंअंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी सुफलाम में किसानों को संबोधित किया। उन्होंने किसानों से गौ आधारित प्राकृतिक खेती करने की अपील की। 
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बीएचयू के स्वतंत्रता भवन में सीएम योगी - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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किसानों की आय बढ़ाने के लिए सरकार गंभीर है और किसानों को योजनाओं के जरिए लाभ दिया जा रहा है। जलवायु परिवर्तन से हो रहे खतरे को देखते हुए अब समय की मांग है कि गौ आधारित प्राकृतिक खेती पर जोर दिया जाए। मुख्यमंत्री योगी आदित्यानाथ ने किसानों को संबोधित करते ये बातें कहीं।

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रविवार को बीएचयू के स्वतंत्रता भवन में आयोजित अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी सुफलाम में सीएम योगी ने किसानों को संबोधित करते हुए कहा कि जलवायु परिवर्तन की वजह से सबसे ज्यादा नुकसान धरती और जल का ही हुआ है। धरती माता के साथ खिलवाड़ गलत है। जो हर हाल में बंद होना चाहिए। इसके लिए यह जरूरी है कि केमिकल युक्त खेती की जगह गौ आधारित प्राकृतिक खेती की जाए।

वाराणसी समेत प्रदेश के आठ जिलों में बनेंगी प्राकृतिक प्रयोगशालाएं

 मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि गंगा के तटवर्ती 27 जिलों में गो आधारित प्राकृतिक खेती होगी।। इसके लिए प्राकृतिक कृषि परिषद का गठन किया गया है। कृषि विज्ञान केंद्रों को भी जोड़ा जा रहा है। वाराणसी समेत आठ जिलों में प्राकृतिक प्रयोगशालाएं भी बनाने की तैयारी चल रही है।

भारत में जी-20 सम्मेलन गर्व की बात 

बीएचयू के स्वतंत्रता भवन में सीएम योगी - फोटो : अमर उजाला
 उन्होंने कहा कि केमिकल युक्त खेती की तुलना में गो आधारित प्राकृतिक खेती फायदेमंद है। इसमें प्रति एकड़ 12 से 15 हजार रुपये लागत कम आती है। अब किसानों को आगे आने की जरूरत है। सरकार हर संभव मदद को तैयार है। नतीजों का अध्ययन कराने के लिए ही गोरखनाथ मंदिर के कृषि फार्म पर प्राकृतिक और केमिकल युक्त खेती कराई गई। परिणाम में सामने आया कि गो आधारित प्राकृतिक खेती में प्रति एकड़ 12 से 15 हजार रुपये की बचत हुई है। केमिकल युक्त खेती महंगी पड़ती है।

प्राकृतिक खेती के प्रमाणीकरण के लिए वाराणसी समेत आठ जिलों में प्राकृतिक प्रयोगशालाएं बनाई जा रही हैं। हर मंडल मुख्यालय, मंडी समिति में प्राकृतिक और जैविक खेती का आउटलेट भी बनाया जा रहा है। प्रदेश के 89 कृषि विज्ञान केंद्र और छह कृषि विश्वविद्यालयों में भी प्रयोगशालाएं तैयार कराई जा रही हैं। सुफलाम पृथ्वी तत्व से संबधित अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन इस दिशा में बड़ी भूमिका निभाएगा।

जी-20 का नेतृत्व बड़ी उपलब्धि

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि देश को जी-20 का नेतृत्व करने का अवसर मिला है, जो बड़ी उपलब्धि है। एक दिसंबर 2022 से 30 नवंबर 2023 तक भारत के पास जी-20 के माध्यम से दुनिया के 20 देशों के लिए नीति बनाने का अवसर है। इसमें दुनिया के 20 बड़े देश हैं, जिनके भीतर दुनिया की 60 फीसदी आबादी निवास करती है। दुनिया के 75 फीसदी व्यापार पर उनका अधिकार है। 85 फीसदी जीडीपी व 90 फीसदी पेटेंट इन्हीं देशाें के पास हैं।

भारतीय मनीषियों ने पंचतत्वों को पहचाना

मुख्यमंत्री ने कहा कि भारतीय मनीषियों ने पंचतत्वों को पहचाना था। संदेश दिया था कि केवल मनुष्य के लिए नहीं, बल्कि चराचर जगत के लिए काम करना है। वनस्पतियां, आश्रम में लगाई जा रही थीं। यज्ञ हवन आदि होते थे। यह संकल्प लिया गया था कि जल को अशुद्ध नहीं करना है। हवा प्रदूषित न हो, इसके लिए अलग-अलग उपक्रम थे। धरती को माता तो कहा जाता है, लेकिन लोग खिलवाड़ कर रहे हैं। जलवायु परिवर्तन देखने को मिल रहा है। यह सेहत के साथ ही कृषि के लिए भी नुकसानदायक है।
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सीएम ने बाबा विश्वनाथ से की लोककल्याण की कामना

श्री काशी विश्वनाथ मंदिर में मुख्यमंत्री ने किया दर्शन पूजन - फोटो : अमर उजाला
 मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ रविवार की शाम को श्री काशी विश्वनाथ मंदिर पहुंचे। उन्होंने बाबा का दर्शन पूजन कर लोक कल्याण की कामना की। मुख्यमंत्री नाव से ललिता घाट पहुंचे और गंगा द्वार से श्री काशी विश्वनाथ धाम होते हुए मंदिर परिसर पहुंचे। 

गर्भगृह में मुख्यमंत्री ने बाबा श्री काशी विश्वनाथ का षोडशोपचार विधि से पूजन किया। इस दौरान मंदिर में उपस्थित श्रद्धालुओं, पुजारियों व कर्मचारियों ने हर-हर महादेव का जयकारा लगाया। पूजन के पश्चात मंदिर के ट्रस्टी पंडित दीपक मालवीय, वेंकट रमन घनपाठी, मंडलायुक्त कौशल राज शर्मा और मंदिर के मुख्य कार्यपालक अधिकारी सुनील कुमार वर्मा ने मुख्यमंत्री को अंगवस्त्र, प्रसाद, रुद्राक्ष की माला भेंट की। 
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