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Chhath Puja: खरना के साथ शुरू हुआ 36 घंटे का निर्जला व्रत, गन्ने के रस की खीर; चावल के पीठे की रोटी का भोग

Sun, 19 Nov 2023 10:42 AM IST
किरन रौतेला न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी

सार

शनिवार को शहर से गांव तक खरना की तैयारियों का नजारा एक जैसा ही रहा। घाट, कुंड और सरोवरों से लौटने के बाद घरों में खरना के प्रसाद की तैयारियां शुरू हो गईं। परंपरागत ढंग से चूल्हे में आम की लकड़ी पर गन्ने के रस से पकी चाल की दूध वाली खीर, चावल का पीठा और घी से चुपड़ी रोटी का प्रसाद बनकर तैयार हुआ।
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अस्सी घाट पर छठ पूजा के अवसर पर बेदी की पूजा गंगा में सूर्य की आराधना करती महिला । - फोटो : संवाद
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विस्तार
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पहिले पहिल हम कईनी, छठी मइया व्रत तोहर, छठी मईया व्रत तोहर...की मीठी धुन गंगा की लहरों से तान मिला रही थी। भगवान भास्कर जैसे-जैसे पश्चिम की ओर बढ़ रहे थे महिलाओं का काफिला भी घाट, कुंड और सरोवरों की ओर बढ़ने लगा। लोक आस्था के महापर्व के दूसरे दिन महिलाओं ने गंगा स्नान के बाद एक दूसरे को सिंदूर लगाया, अखंड सुहाग और संतति के स्वास्थ्य की कामना की।

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शनिवार को शहर से गांव तक खरना की तैयारियों का नजारा एक जैसा ही रहा। घाट, कुंड और सरोवरों से लौटने के बाद घरों में खरना के प्रसाद की तैयारियां शुरू हो गईं। परंपरागत ढंग से चूल्हे में आम की लकड़ी पर गन्ने के रस से पकी चाल की दूध वाली खीर, चावल का पीठा और घी से चुपड़ी रोटी का प्रसाद बनकर तैयार हुआ। महिलाओं ने खरना का प्रसाद ग्रहण करने के बाद 36 घंटे का निर्जला व्रत शुरू हो गया। दिन में तीन बजे के बाद व्रती महिलाओं के कदम घाट की ओर बढ़ने लगे थे। पहले तो घाट पर बैठकर महिलाओं ने छठ मैया के गीत गुनगुनाए। इसके बाद गंगा स्नान करके दीपदान किया। घाट के किनारे बनाई गई वेदियों पर दीप जलाकर सुख, सौभाग्य और संतति की कामना की।

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देर रात तक चलती रही छठ की तैयारी, गूंजते रहे छठ के गीत
घरों से घाट तक छठ के गीत गूंज रहे हैं। दिनभर व्रत रखने के बाद व्रतियों ने खरना का प्रसाद ग्रहण किया। बरेका की रहने वाली संगीता प्रसाद ने बताया कि सुबह से ही परिवार में उत्साह का माहौल है। दिनभर सफाई व पूजन सामग्री तैयार की। हरियाणा से मेरी ननद ज्योति भी छठ पूजा करने आई है। शनिवार को निराजल व्रत रखकर रात में पूजा की।नगवां की 65 वर्षीय शकुंतला देवी 35 वर्षों से छठ पूजा करती हैं। अब वह अपने तीन बहुओं संग छठ पूजा करती हैं। उनकी बेटी भी सारनाथ से आई है। पूजन सामग्री की शुद्धता पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है, ताकि इस व्रत व पूजा की पवित्रता को कायम रखा जा सके।

भगवानपुर की आशा भी इस पूजा की तैयारी में लगी हैं। नहाय खाय के बाद शनिवार को खरना का व्रत रखा रविवार को निराजल व्रत रखेंगी। उन्होंने बताया कि 20 सालों से व्रत रखती हूं। पूजा में मेरे रिश्तेदार भी शामिल होते हैं।

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छठ पूजा के लिए वाराणसी के घाट तैयार - फोटो : अमर उजाला
जारी किए गए चार हजार पास, ठहरने के लिए 200 बेड का इंतजाम
सूर्य सरोवर पर बरेका छठ समिति ने पूजा की तैयारियों को अंतिम रूप दिया गया। छठ समिति के महामंत्री अजय आर ने बताया कि व्रती महिलाओं के कपड़े बदलने के लिए सरोवर के चारों तरफ 25 चेंजिंग रूम बनाए गए हैं। भीड़ को नियंत्रित करने के लिए चार हजार पास बांटे गए हैं। सरोवर पर जाने के लिए चार गेट बनाए गए हैं। इन्हीं गेटों से चार हजार पासधारी व उनके परिवार के लोग जाएंगे। सरोवर के एक किनारे पर रात में ठहरने के लिए 200 बेड की भी व्यवस्था की गई है। सरोवर के चारों तरफ फॉगिंग के साथ ही लाइटिंग की भी व्यवस्था है। सरोवर पर रात भर निःशुल्क चाय का वितरण किया जाएगा। समिति की तरफ से रात में 108 बार हनुमान चालीसा व सुंदरकांड का पाठ किया जाएगा। रेलवे पुलिस के साथ जिला पुलिस समन्वय करके सुरक्षा की जिम्मेदारी संभालेंगे। यहां पर डेढ़ सौ वालंटियर के अलावा दर्जन भर तैराक और एनडीआरएफ की दो टीमें बराबर गश्त करती रहेंगी।

प्रकाश की व्यवस्था जनरेटर के सहारे

बरेका के सूर्यसरोवर पर रविवार को होने वाली छठ पूजा में इस बार जनरेटर के सहारे प्रकाश की व्यवस्था की गई है। लोगों का कहना है कि यहां पर विजयादशमी हो या कोई और कार्यक्रम बरेका बिजली निःशुल्क देता है, लेकिन छठ पूजा के लिए सूर्यसरोवर पर प्रकाश की व्यवस्था में बरेका ने बिजली देने से मना कर दिया है।

घर पर रिश्तेदारों का जमावड़ा

छठ महापर्व के लिए घरों में तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। दूर दराज से रिश्तेदार भी इस पूजन में शामिल होने के लिए पहुंचे हैं। चोलापुर ब्लाक के गोमती नदी, वनस्पति घाट, नियार, बाबतपुर, रजला, अजगरा, भदवा के गोमती घाटों पर महिलाओं ने वेदी बनाकर पूजन कर स्नान किया।
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