काशी विश्वनाथ मंदिर में नवरात्र के प्रथम दिन आयोजित सांस्कृतिक संध्या में नृत्य की प्रस्तुति दे
वाराणसी। शारदीय नवरात्र के पहले दिन रविवार को श्रीकाशी विश्वनाथ धाम में शुभ लग्न में वैदिक मंत्रोच्चार के साथ कलश स्थापित कर नौ दिवसीय शक्ति आराधना का विधिवत श्रीगणेश किया गया। अनुष्ठान के दौरान 11 वैदिक विद्वानों ने सामूहिक रूप से दुर्गा सप्तशती का सस्वर पाठ कर वातावरण को शक्तिमय बना दिया। धाम की पुरातन परंपरा का पालन करते हुए श्रीकाशी विश्वनाथ मंदिर न्यास द्वारा मां विशालाक्षी और प्रथम स्वरूप मां शैलपुत्री के लिए विशेष पूजन सामग्री भेजी गई। बाबा विश्वेश्वर को स्पर्श कराकर आशीर्वाद लेने के उपरांत साड़ी, चुनरी, मिष्ठान, ताजे फल और संपूर्ण शृंगार सामग्री माता के मंदिरों के लिए प्रस्थान कराई गई। डमरू दल के वादन और शंख की गूंज के बीच सेवादार श्रद्धापूर्वक यह भेंट लेकर शक्तिपीठों तक पहुंचे।
शाम ढलते ही विश्वनाथ धाम के चौक प्रांगण में स्थानीय कलाकारों ने देवी भजनों की सुमधुर प्रस्तुतियां देकर श्रद्धालुओं को भावविभोर कर दिया। दिनभर भक्तों ने पहले बाबा विश्वनाथ की चौखट पर शीश नवाया और फिर माता के दरबार में पहुंचकर मंगलकामना की। मंदिर प्रशासन के एसडीएम शंभू शरण ने बताया कि नवरात्र के पूरे नौ दिन माता विशालाक्षी सहित नवदुर्गा के सभी प्रमुख मंदिरों में बाबा के दरबार से प्रतिदिन मंगल भेंट भेजी जाएगी। साथ ही धाम परिसर में नित्य पूजन और भक्तिमय सांस्कृतिक कार्यक्रमों का क्रम अनवरत जारी रहेगा।
विश्व कल्याण के लिए नौ दिवसीय शतचंडी महायज्ञ
गणेश बाग स्थित श्रीविद्या साधना पीठ में रविवार को शारदीय नवरात्र पर विश्व कल्याणार्थ नौ दिवसीय चतुरावृत्ति शतचंडी महायज्ञ का शुभारंभ हुआ। अनुष्ठान धर्मसम्राट स्वामी करपात्री महाराज के शिष्य स्वामी दत्तात्रेयानंद नाथ की तपोभूमि में प्रारंभ हुआ। इक्कीस वैदिक आचार्यों द्वारा भगवती ललिता महात्रिपुरसुन्दरी की उपासना के लिए धार्मिक अनुष्ठान किए जा रहे हैं। पीठाध्यक्ष स्वामी प्रकाशानंदनाथ के सानिध्य में पहले दिन गणपति का सहस्त्र लड्डुओं से मोदकार्चन किया गया।