संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय के परीक्षा नियंत्रक विशेश्वर प्रसाद ने बताया कि विश्वविद्यालय में 2019 तक की सभी उपाधियां महाविद्यालयों को दी जा चुकी हैं। विश्वविद्यालय में डिग्री की पेंडिंग बेहद कम है। वहीं वर्तमान सत्र की डिग्रियां तैयार हैं और जल्द ही उनका भी वितरण कर दिया जाएगा।
2013 से भटक रहे हैं डिग्री के लिए लिए
महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ में एमजेएमसी का छात्र 2013 से भटक रहा है। छात्र ने बताया कि उसने जब डिग्री के लिए आवेदन किया तो कहा गया कि अस्थायी डिग्री ले लिजिए, अभी डिग्री तैयार नहीं है।
राजभवन की मंशा समय से मिले उपाधि
विश्वविद्यालय में प्रति वर्ष दीक्षांत समारोह करने के पीछे राजभवन की मंशा रहती है कि विद्यार्थियों को समय से उपाधियां मिल सके। वहीं दूसरी ओर दीक्षांत समारोह के दौरान काशी विद्यापीठ में विभिन्न पाठ्यक्रम के टॉप-10 विद्यार्थियों को उपाधि दी जाती है। शेष विद्यार्थियों को अस्थायी उपाधि उपलब्ध दी गई हैं।
अस्थायी प्रमाणपत्र छह माह के लिए मान्य
अस्थायी उपाधि महज छह माह के लिए मान्य होती है। छह माह बाद छात्रों को अस्थायी उपाधि के लिए फिर से आवेदन करना होता है। इतना ही नहीं इसके लिए छात्रों को प्रत्येक छह माह में शुल्क भी जमा करना पड़ रहा है। इस प्रकार छात्रों पर आर्थिक बोझ के साथ-साथ प्रमाणपत्र हासिल करने के लिए बार-बार समय भी बर्बाद करना पड़ रहा है।