अंजान के लोकप्रिय गीत खई के पान बनारस वाला/खुलि जाए बंद अकल का ताला....को बोल पर सुरों को सजाकर पार्श्व गायक केंद्रीय भारी उद्योग मंत्री बाबुल सुप्रियो ने शुक्रवार की रात जहां काशीवासियों को झुमाया, वहीं कहीं अलविदा ना कहना... जैसे तराने के जरिए दिलों से रिश्ता भी जोड़ा। देर रात तक उनके साथ टाउन हाल के मैदान में बच्चे, महिलाएं, युवा सभी झूमते रहे।
बाबुल सुप्रियो ने सबसे पहले मुसाफिर हूं यारों ना घर है ना ठिकाना...के बाद गोपाल दास नीरज के गीत- शोखियों में घोला जाए फूलों का शवाब...को सुरों से सजाया। इसके बाद उन्होंने सांसों को ढलने दो जरा...ये जो मोहब्बत है...कहो ना प्यार है....पग घुंघरू बांध मीरा नाची रे...जैसे गीतों की प्रस्तुति की।
काशीवासियों के आग्रह पर उन्होंने जय - जय शिवशंकर...गीत भी सुनाकर सबका दिल जीत लिया। अंत में उन्होंने गीत -कभी अलविदा ना कहना... से विदा ली। मुंबई से आई पार्श्व गायिका प्रीति सेठ ने उनके साथ सुरों का जादू बिखेरा।
प्रीति ने सबसे पहले पिया तूं... और इसके बाद -दम मारो दम...से सबका दिल जीत लिया। इनके बाद रियलिटी शो वायस आफ इंडिया के उपविजेता मल्हार कर्माकर ने अपने गीतों से संगीत प्रेमियों को बांदे रखा। स्थानीय कलाकारों में सबसे पहले राजू श्रीवास्तव ने गीत -मेरे सपनों की रानी...मै हूं झूम झूम झूम झूमरो...की प्रस्तुति की।
कमलेश एवं ज्योति ने गीत -कोरा कागज था ये मेरा ... को सुनाकर तालियां बटोरीं। शंकर नारायण ने गीत -नीले- नीले अंबर पे...रंजन एवं संयुक्ता ने -देखा एक ख्वाब तो ये सिलसिला हुआ...पेश किया। शाहिद अख्तर ने पल- पल दिल के पास...की प्रस्तुति की।
विजय कुमार, प्रमोद कुमार श्रीवास्तव, भानु नारायण, आकाश एवं वंदना, पूजा भसक, अंजलि एवं अभिषेक, स्मृति शुक्ला ने अपने सुरों से लोगों का दिल जीत लिया। सुरगंगा थीम सांग की प्रस्तुति आबिद जमाल ने की। इससे पहले केंद्रीय मंत्री बाबुल सुप्रियो ने पत्नी के साथ भैंसासुर घाट पर गंगा आरती का भी अवलोकन किया।