बलिया के निकलने के बाद बृहस्पतिवार को एक ट्वीट में सूर्य प्रताप सिंह ने लिखा कि रास्ता बहुत ख़राब है, गड्ढामुक्त नहीं है। मगर खुशी है कि 'बागी बलिया' जा रहा हूं। 1942 में भारत का तिरंगा फहराने वाला बलिया देश का पहला जिला बना। अन्याय के खिलाफ आवाज उठाने में बलिया का इतिहास स्वर्णिम है और दिल बड़ा है। उन्होंने ऋषि भृगु की धरती व पवित्र मां गंगा को प्रणाम किया।
25 साल में 54 ट्रांसफर
शुक्रवार को अपने एक अन्य ट्वीट में रिटायर्ड आईएएस सूर्य प्रताप सिंह ने बताया कि 25 साल में 54 ट्रांसफर हुए। जब मेरी सदनीयत व नीतियां नहीं बदल सके तो एक एफआईआर क्या बदलेगी? उन्होंने कहा, सत्य पक्ष हमेशा सत्ता पक्ष पर भारी पड़ता है।
रिटायर्ड आईएस अफसर अधिकारी सूर्य प्रताप सिंह ने अपने ट्वीटर पर एक फोटो अटैच करते हुए बलिया में गंगा नदी के किनारे 67 शवों के मिलने की बात लिखी। इस प्रकरण के संज्ञान में आने के बाद 12 मई को नगर कोतवाल बालमुकुंद मिश्र ने सूर्य प्रताप सिंह के खिलाफ धारा 505 (सार्वजनिक शांति के विरुद्ध अपराध करने के आशय से असत्य कथन, जनश्रुति आदि परिचालित करना) तथा सूचना प्रौद्योगिकी संशोधन अधिनियम की धारा 67 (इंटरनेट पर अश्लील समाग्री डालना) के तहत नामजद मुकदमा दर्ज कराया। इस बाबत कोतवाल बालमुकुंद मिश्र ने बताया कि एक माह पहले मुकदमा दर्ज किया गया था। इसकी विवेचना दुबहर थाने के एसआई कर रहे हैं।