कैसर पीड़ित अरविंद पांडेय ने पूरी की अंतिम इच्छा
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अरविंद ने जब वायलिन वादन पूरा किया तो सभागार में मौजूद हर शख्स तालियां बजा रहा था लेकिन उनकी आंखों की कोर नम थी। अरविंद को सुनने के लिए उनके शिष्य अमेरिका, बेंगलुरू और मुंबई से पहुंचे थे।
अरविंद पांडेय ने बताया कि 2017 में कैंसर का पता चला। मुंबई में इलाज के बाद ठीक हो गया था लेकिन कोविड काल में फिर से यह सामने आ गया। समय से इलाज नहीं मिलने के कारण स्थिति बिगड़ गई। 40 कीमोथेरेपी कराने के बाद भी कोई फायदा नहीं है अब तो बस म्यूजिकोथेरेपी ही मेरा सहारा है।
अरविंद ने बताया कि राजकपूर की जोकर फिल्म का गीत 'जाने कहां गए वो दिन' सुनकर मेरे मन में वायलिन बजाने की इच्छा जगी थी। 1992 में बीएचयू से संगीत की डिग्री ली। मैंने अपनी गुरु प्रो. एन राजम के साथ संकटमोचन संगीत समारोह में संगत भी की। प्राइवेट स्कूल में संगीत के टीचर की नौकरी करते हुए बच्चों को वायलिन का प्रशिक्षण दे रहा था।