श्रीलंका के भिक्षु अमृतानंद ने चीवर पूजा व विश्व शांति का कराया पाठ
तथागत की उपदेश स्थली में 210 सदस्यीय श्रीलंका के बौद्ध भिक्षुओं ने महाबोधि सोसाइटी ऑफ इंडिया से कठिन चीवर पूजा व विश्व शांति के लिए शोभायात्रा निकाली। इसमें सबसे आगे धम्म चक्र प्रवर्तन मुद्रा में भगवान बुद्ध की लगभग चार फीट की प्रतिमा को बौद्ध भिक्षु की लगभग चार फीट की प्रतिमा को बौद्ध भिक्षु लिए हुए चल रहे थे। वही प्रतिमा के बगल में दोनों तरफ विशालकाय हाथी दांत के साथ चमकीले पीले व सफे द छतरी लिए हुए कतारबद्ध होकर पारंपरिक मंत्रोचार के साथ चल रहे थे।
यह शोभायात्रा संग्रहालय होते हुए खंडहर परिसर होकर प्राचीन मूलगंध कुटी विहार, धमेख स्तूप की परिक्रमा कर धर्मराजिका स्तूप पहुंचे। वहां भगवान बुद्ध की प्रतिमा को कपड़ो से बने चमकीले पीले व सफेद कमल पुष्प पर रखा गया। जहां दर्जनोंकी संख्या में विभिन्न प्रकार के फलो से भरे पात्रोंको सजाकर रखा गया है। वही धर्मराजिका स्तूप को फूल मालाओं के साथ पंचशील झंडो से सजाया गया था। यहां सैकड़ों की संख्या में बौद्ध भिक्षुओं को श्रीलंका के भिक्षु अमृतानंद ने कठिन चीवर पूजा व विश्व शांति का पाठ करया।