बीएचयू बाल रोग विभाग की प्रोफेसर और थैलेसीमिया रोग की विशेषज्ञ प्रो. विनीता गुप्ता ने बताया कि यह एक अनुवांशिक बीमारी है। इसका अंतिम उपचार रक्त ट्रांसप्लांट ही है।
बीएचयू अस्पताल में अब थैलेसीमिया पीड़ित बच्चों का ब्लड ट्रांसप्लांट किया जा सकेगा। यह सुविधा अब तक नहीं होने से बच्चों को परेशान होना पड़ता था। जल्द ही यहां यह सुविधा शुरू होगी। ट्रॉमा सेंटर परिसर स्थित बोन मैरो ट्रांसप्लांट में आयोजित एक कार्यक्रम में 35 बच्चों का पंजीकरण किया गया। करीब 60 लोगों का ब्लड सैंपल लेकर जांच कराई जाएगी। इसके बाद ट्रांसप्लांट कराया जा सकेगा।
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बीएचयू बाल रोग विभाग की प्रोफेसर और थैलेसीमिया रोग की विशेषज्ञ प्रो. विनीता गुप्ता ने बताया कि यह एक अनुवांशिक बीमारी है। इसमें बच्चों की सेहत पर बहुत अधिक ध्यान देने की जरूरत है। इसमें बच्चों का खून हर सप्ताह नियमानुसार बदलना पड़ता है। यह लंबे समय तक चलने वाली प्रक्रिया है। इसका अंतिम उपचार रक्त ट्रांसप्लांट ही है।
प्रो. विनीता ने बताया कि शुक्रवार को बच्चों का पंजीकरण कर माता-पिता और संबंधियों को मिलाकर कुल 60 लोगों का सैंपल लिया गया। इसे जांच के लिए दिल्ली भेजा गया है। तीन से चार सप्ताह में रिपोर्ट आएगी। कार्यक्रम में आईएमएस निदेशक प्रो. बीआर मित्तल, प्रो. अशोक कुमार, ट्रामा सेंटर प्रभारी प्रो. सौरभ सिंह, प्रो. संजीव गुप्ता, डा. संदीप कुमार, डॉ. एसके सिंह मौजूद रहे।