यूपी के बलिया जिले के मनियर नगर पंचायत में पहली बार कमल का फूल खिला है। इतना ही इस नगर पंचायत का चेयरमैन भी चायवाले का बेटा बना है। अध्यक्ष के कुर्सी पर जीत हासिल करने वाले भाजपा प्रत्याशी भीम गुप्ता की राजनीतिक पृष्टिभूमि तो नहीं है, लेकिन चुनाव में जीत हासिल कर सभी को चौंका दिया है।
नगर पंचायत की कुर्सी पर चाय बेचने वाला का बेटा विराजमान होगा। भीम गुप्ता के पिता गौतम गुप्ता चाय की दूकान चलाकर अपना तथा परिवार का भरणपोषण करते हैं। इतना ही नहीं उसके दादा स्व. महेश गुप्ता कभी कस्बे में खोमचा लगाकर अपना तथा परिवार का जीवन यापन करते थे। बलिया में नगर पंचायत मनियर राजनीतिक दृष्टिकोड़ से भी काफी अहम माना जाता है।
इस बार नगर पंचायत चुनाव में जहां दो दिग्गजों ने अपने प्रत्याशियों को नगर पंचायत चुनाव में उतारा था। वहीं भाजपा अपने दम-खम के बलबूते पर नगर पंचायत चुनाव लड़ रही थी। अबकी बार नगर पंचायत चुनाव में लोगों ने दिग्गजों की न सुनकर अपने मन मुताबिक अपना अगुवा का चुनाव किया है।
यदि देखा जाए तो नगर पंचायत में भाजपा के भीम गुप्ता को 2784 मत मिले, वहीं कांगे्रस समर्थित प्रत्याशी धर्ल्मशीला को 2047 मत, भासपा के प्रत्याशी धर्मेंद्र कुमार मणिक को 1786, बसपा के दिनेश वर्मा को 799, सपा के प्रदीप गुप्ता 684, जबकि कम्युनिस्ट पार्टी के वशिष्ठ को 514, निर्दल संतोष को 176 सहित अन्य निर्दलों को अपना-अपना मत प्राप्त हुआ है वहीं नोटा में भी 60 मत पड़े है।
नगर पंचायत मनियर में पहली बार भीम गुप्ता ने अपने निकटमत प्रतिद्वंदी कांग्रेस समर्थित प्रत्याशी धर्मशीला को 737 मतों से पराजित कर जीत का ताज अपने सिर सजाया है।
मतगणना
बलिया के दो नगर पालिका और आठ नगर पंचायतों में हुए चुनाव में 10 के सिर अध्यक्ष पद का ताज सजा जबकि 167 सभासद भी जीतकर मिनी सदन पहुंचे। कई सीटों पर कड़े मुकाबले में भाजपा और निर्दल को चार-चार जबकि बसपा-सपा को एक-एक सीट पर जीत मिली।
शुक्रवार को हुई मतगणना का कार्य कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बीच कराया गया। जिलाधिकारी व एसपी समेत प्रशासनिक अधिकारी भी पूरे दिन चौकस रहे।
नामांकन पत्रों की जांच के बाद अध्यक्ष पद के कुल 106 व सभासद पद के कुल 964 प्रत्याशी मैदान में थे। दो नगर पालिका व आठ नगर पंचायतों के 115 मतदान केंद्रों के 387 बूथों पर 26 नवंबर को मतदान कराया गया। मतदान में कुल एक लाख 55 हजार 754 मतदाताओं ने अपने मतों का प्रयोग किया था।
मतों की गिनती के लिए जिला प्रशासन की ओर से अलग-अलग कुल आधा दर्जन मतगणना स्थल बनाए गए थे। मतगणना के लिए कुल 159 टेबल बनाए गए थे जहां शुक्रवार को सुबह आठ बजे मतगणना शुरू हुआ और शाम करीब चार बजे तक सभी निकायों के परिणाम भी आ गए।
कई सीटों पर कांटे का मुकाबला भी रहा तो किसी ने जिले में सबसे अधिक मतों से जीत हासिल की। नगर पालिका रसड़ा में मुकाबला काफी कांटे का रहा और यहां हार जीत का फैसला महज 67 मतों से हुआ।
यहां निर्दल मोतीरानी ने बसपा के प्रियंका गुप्ता को हराया। इसी तरह सिकंदरपुर नगर पंचायत में मुकाबला काफी कांटे का रहा और भाजपा प्रत्याशी रविन्द्र प्रसाद ने सपा प्रत्याशी भीष्म यादव को महज 10 वोटों से हराया।
निर्दलीयों ने सत्ता व विपक्ष को झकझोरा
मतगणना
निकाय चुनाव की मतगणना पूरी होने के साथ ही शुक्रवार की शाम तक पूरी तस्वीर भी साफ हो गई। इस चुनाव में निर्दलीयों ने सत्ता व विपक्षी पार्टियों को झकझोक कर रख दिया। भाजपा को जहां चार तो सपा व बसपा को एक-एक सीट से संतोष करना पड़ा। निर्दलीय प्रत्याशी चार सीटों पर जीतने में सफल रहे। इस परिणाम से मंत्री व पूर्व मंत्रियों का दांव उल्टा पड़ता रहा।
नगर निकाय चुनाव पहली बार पार्टी स्तर पर लड़ा गया और अध्यक्ष से लेकर सभासद पद तक के प्रत्याशियों को अलग-अलग पार्टियों की ओर से टिकट दिया गया था। पार्टी का टिकट लेने के लिए कमोवेश सभी दलों में मारामारी मची थी लेकिन अंतिम निर्णय के बाद कई प्रत्याशियों ने निर्दलीय के तौर पर चुनाव लड़ा। चुनाव प्रचार में सबसे अधिक प्रदेश की सत्ताधारी पार्टी भाजपा ने ताकत झोंकी थी। आलम यह था कि राज्य मंत्री उपेंद्र तिवारी ने जहां सभी निकायों में प्रचार किया था, वहीं जिला मुख्यालय पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने चुनावी सभा की थी।
इसके अलावा सत्ता पक्ष के सांसद व विधायक ने भी प्रत्याशियों को जिताने के लिए प्रचार किया था। लेकिन इतनी ताकत के बावजूद भाजपा को महज चार सीट नगर पंचायत बैरिया, सिकंदरपुर, मनियर व बेल्थरारोड अध्यक्ष पद ही हाथ लग सका। इसके अलावा नेता प्रतिपक्ष रामगोविंद चौधरी ने खूब चुनावी सभा की लेकिन कोई खास सफलता नहीं मिली लेकिन वह अपने विधानसभा की एक सीट बांसडीह नगर पंचायत अध्यक्ष पद को जिताने में सफल रहे।
इसी तरह बसपा को भी जिले में कोई खास सफलता तो नहीं मिली लेकिन पूर्व मंत्री ने अपने विधानसभा क्षेत्र के एक मात्र नगर पंचायत चितबड़ागांव नगर पंचायत अध्यक्ष पद की सीट को पार्टी के पाले में करने में सफल रहे। सांसद क्षेत्र की बात करें तो सलेमपुर सांसद के क्षेत्र में तीन नगर पंचायत अध्यक्ष पद पर सफलता मिली तो बलिया के सांसद को एक मात्र बैरिया नगर पंचायत अध्यक्ष पद को ही जिता सके।
विधायकों की बात करें तो बैरिया, सिकंदरपुर व बेल्थरारोड के विधायक अपनी प्रतिष्ठा बचाने में सफल रहे। बांसडीह विधायक व नेता प्रतिपक्ष केवल एक सीट बचा सके तो रसड़ा विधायक को मायूसी ही हाथ लगी।
भीतरघात व कार्यकर्ताओं का असंतोष पड़ा भारी!
election
निकाय चुनाव में कमोवेश सभी पार्टियों को नुकसान उठाना पड़ा है। इसे कार्यकर्ताओं में असंतोष कहें या फिर भीतरघात। हालांकि विधानसभा चुनावों के आधार पर देखें तो सात के सापेक्ष बसपा व सपा एक सीट मिली थी तो निकाय चुनाव में 10 के सापेक्ष एक-एक सीट मिली है।
हालांकि नुकसान की बात करें तो इस आधार पर भाजपा को सबसे अधिक नुकसान उठाना पड़ा है। यहां तक कि राज्य मंत्री के विस क्षेत्र के चितलबड़ागांव नगर पंचायत अध्यक्ष पद की सीट भी बसपा की झोली में डालकर पूर्व मंत्री ने अपनी हार का कसक मिटा लिया।
बताया जाता है कि निकाय चुनाव में भाग्य आजमाइश करने के लिए सभी दलों से टिकट पाने के लिए एक से अधिक दावेदार थे। लेकिन नामांकन के कुछ दिनों पहले पार्टियों की ओर से टिकट फाइनल किया।
आलम यह रहा कि इसके बाद कुछ ने बागी तेवर अपनाए तो कुछ ने भीतरघात करने का मन बना लिया। इसके अलावा टिकट बंटवारें को लेकर कई निकायों में पार्टी कार्यकर्ताओं में रोष रहा। इसका अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है जीते कई निर्दलीय प्रत्याशी ऐसे भी हैं जो किसी न किसी दल से टिकट मांग चुके थे।
कयास लगाए जा रहे हैं जहां पार्टी पदाधिकारियों व नेताओं ने कार्यकताओं की मंशा के विपरीत प्रत्याशी उतारा वहां उन्हें हार का सामना करना पड़ा है। कयास यह भी लगाए जाते हैं कि पार्टियों से टिकट नहीं पाने वाले दावेदारों ने एकजुट होकर पार्टी को सबक सिखाने का काम किया।इससे अलग यह भी सच है कि कई दलों का निकाय चुनाव में सूपड़ा ही साफ हो गया है। हालांकि कई दल चुनाव में सभी निकायों में प्रत्याशी भी नहीं उतार सके थे।