इसमें हवाला दिया गया कि करीब साढ़े तीन करोड़ रुपये के टेंडर के अनुसार खनिज की मात्रा कम प्राप्त हुई। खनन विभाग ने समयावधि बढ़ाने के लिए शासन से अनुमति भी मांगी है। यहां बता दें कि गंगा में बालू उठान के लिए मिले टेंडर के नाम पर काशी के घाटों के सामने मनमाने तरीके से रेत खोदा गया है।
खनन की न निगरानी, न ही आकलन
गंगा पार रेती में बालू उठान के टेंडर के बाद खनन विभाग ने यहां निगरानी की कोई व्यवस्था नहीं की। यही कारण है कि अब तक इसका आकलन नहीं किया गया है कि कितना बालू का उठान या अवैध खनन किया गया है। अब तक खनन विभाग के पास वैध या अवैध खनन को लेकर कोई आंकड़ा उपलब्ध नहीं है।