कार्यकाल के अंतिम दिन कहा, मजबूरी में अयोग्य लोगों की करनी पड़ी नियुक्ति
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बीएचयू कुलपति प्रो. जीसी त्रिपाठी ने अपने कार्यकाल के अंतिम दिन 26 नवंबर को आयोजित विदाई समारोह में दिए भाषण में कुछ ऐसी बातें कहीं जिसके बाद से सोशल मीडिया पर भूचाल आ गया है। उन्होंने कहा था कि बीएचयू कुलपति पद पर रहते हुए मजबूरी में अयोग्य लोगों की नियुक्ति करनी पड़ी।
उनके इस बयान पर न केवल बीएचयू के प्रोफेसर-छात्र बल्कि गोरखपुर विश्वविद्यालय सहित अन्य विश्वविद्यालयों के प्रोफेसर और युवा भी फेसबुक, व्हाट्सएप, ट्विटर आदि माध्यमों के जरिए इस पर खूब टिप्पणी कर रहे हैं। हर कोई इस बयान पर आश्चर्य जताते हुए इसकी निंदा कर रहा है।
भाषण के इस अंश के वीडियो और अखबारों में प्रकाशित उनके वक्तव्य की कटिंग भी खूब अपलोड की जा रही है। साथ ही, प्रो. जीसी त्रिपाठी और उनके कार्यकाल में की गई नियुक्तियों की जांच की पुरजोर मांग भी चल रही है।
बीएचयू के केएन उडप्पा सभागार में विश्वविद्यालय के अधिकारियों, संस्थान के निदेशकों, संकायाध्यक्षों, प्राध्यापकों और कुछ छात्रों के बीच प्रो. त्रिपाठी ने जो कुछ कहा, लोग अलग-अलग तरीके से उसकी व्याख्या कर रहे हैं।
जो भी हो इस बयान से उन लोगों को बल मिल गया जो समय-समय पर विश्वविद्यालय में होने वाली नियुक्तियाें में मानकों की अनदेखी का आरोप लगाते हुए सवाल उठाते हैं।