बीएचयू के सर सुंदर लाल अस्पताल में आईसीयू में बेड की कमी से मरीजों की सांसत देखकर कोई भी व्यथित हो जाएगा। रोजाना मरीज और उनके परिजन यहां बेड खाली न होने से परेशान होते हैं लेकिन उनकी सुनने वाला कोई नहीं होता।
शारीरिक, मानसिक थकान झेलने के बावजूद जब बेड मुहैया नहीं हो पाता तो उन्हें विवश होकर निजी अस्पतालों की राह पकड़नी पड़ती है या फिर तड़पते रह जाना पड़ता है। कई बार तो इंतजार में मरीज की सांसें ही उखड़ जाती हैं। स्टाफ नर्स मंजू की मौत से पहले भी कई ऐसे मामले सामने आ चुके हैं, जब आईसीयू में जगह न मिलने से मरीज की मौत हुई।
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बीएचयू अस्पताल का हाल, 1560 बेड की सुविधा मगर आईसीयू में सिर्फ इतने
अस्पताल प्रशासन के जिम्मेदार भी मानते हैं कि आईसीयू में मात्र 16 बेड होने से खासी दिक्कतें होती हैं। इतने वीआईपीज के फोन आते हैं कि आम मरीजों में किसी को यहां बेड मुहैया हो जाए तो भाग्य की बात समझिए। बावजूद इसके जिम्मेदार आंखें मूंदे बैठे हैं।
सर सुंदरलाल अस्पताल की आईसीयू की क्षमता बढ़ाने के नाम पर डेढ़ साल से महज आश्वासन की घुट्टी पिलाई जा रही है। बीएचयू को इसका प्रस्ताव तैयार करने में ही तकरीबन साल भर लग गए। छह महीने पहले किसी तरह प्रस्ताव तैयार कर स्वास्थ्य मंत्रालय को भेजा भी गया तो उसे अब तक मंजूरी ही नहीं मिल पाई और इसकी बड़ी वजह भी बीएचयू प्रशासन की उदासीनता बताई जा रही है।
अस्पताल प्रशासन के मुताबिक यह प्रस्ताव 50 बेड की आईसीयू के लिए भेजा गया है। मंत्रालय से मंजूरी के बाद इस पर काम शुरू होगा। लेकिन, जानकारों का दावा है कि जिस हिसाब से बीएचयू अस्पताल में मरीजों का दबाव है या फिर मेडिकल काउंसिल आफ इंडिया का मानक है, यह भी नाकाफी होगा।
मेडिकल काउंसिल आफ इंडिया के मुताबिक किसी भी मेडिकल कॉलेज/अस्पताल में कुल बेड का दस प्रतिशत बेड आईसीयू में होना चाहिए । बीएचयू अस्पताल की बात करें तो यहां महज एक प्रतिशत बेड आईसीयू में है।
रोजाना औसतन 10 मरीज बेड खाली न होने के चलते लौटा दिए जाते हैं। 1560 बेड के अस्पताल की आईसीयू तय मानक के अनुरूप 156 बेड की होनी चाहिए लेकिन मौजूदा समय यहां सिर्फ 16 बेड हैं।