ऑपरेशन में मरीज के चेहरे पर कोई भी चीरा नहीं लगाया गया। कृत्रिम जबड़े को स्क्रू के द्वारा जाइगोमैटिक बोन में प्रत्यारोपित किया गया। प्रो. नरेश ने बताया कि तीन घंटे तक चले ऑपरेशन के बाद मरीज अब मुंह के द्वारा आसानी से खाना खा सकेगा। उसके बोलने का उच्चारण भी स्पष्ट होगा।
इस कृत्रिम जबड़े में दांत लगाने की भी सुविधा मौजूद है, जो कि तीन महीने बाद दूसरे स्टेज में किया जाएगा। इस ऑपरेशन के दौरान तालू का छेद भी बंद कर दिया गया। टीम में डॉ. नेहा साह, डॉ. रवीना राजपूत, डॉ. शरन्या, डॉ. तनीशा, डॉ. अर्जुन के साथ ही एनीस्थिीसिया विभाग की टीम भी मौजूद रही।