फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

जब बीएचयू का कुलगीत सुन दिल्ली में रुक गए डाक्टर राधाकृष्णन

विज्ञापन
विज्ञापन
वाराणसी। भारत के पूर्व राष्ट्रपति सर्वपल्ली राधाकृष्णन की जन्म तिथि (05 सितंबर)को शिक्षक दिवस के रूप में तो मनाया जाता है, लेकिन काशी से उनका कितना अधिक जुड़ाव रहा है,उसका अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि नौ साल बीएचयू के कुलपति(1939-1948) रहने के बाद दिल्ली में एक कार्यक्रम में जब छात्रो ने बीएचयू का कुलगीत गाया तो तत्कालीन राष्ट्रपति राधाकृष्णन तुरन्त रुक गए और छात्रो से मुलाकात की। बीएचयू में वर्ष 1939 से 1948 तक उन्होने न केवल बतौर कुलपति जिम्मेदारियों का निर्वहन किया बल्कि छात्रों के बीच एक अलग पहचान भी रगों। बीएचयू में कुलपति के रूप में वेतन ना लेने का मामला हो या फिर छात्र छात्राओं की समस्याओं का समाधान करने की बात हो राधाकृष्णन के सफल कार्यकाल को आज भी लोग याद करते हैं।
विज्ञापन

बीएचयू के संगीत मंच कला संकाय के पूर्व आचार्य पद्मश्री प्रोफ़ेसर राजेश्वर आचार्य के मुताबिक वर्ष 1964 में तत्कालीन कल्चरल सेक्रेट्री स्टूडेंट काउंसिल के रूप में वह राष्ट्रीय युवा महोत्सव नई दिल्ली में बीएचयू टीम का नेतृत्व कर रहे थे। तत्कालीन राष्ट्रपति राधाकृष्णन से मिलने का सपना था। आयोजको की ओर से उन्हें पहले ही निर्देश दिया गया था कि कार्यक्रम के दौरान किसी भी जगह से हटना नहीं है। मगर हम लोग उनसे मिलना चाहते थे और जैसे ही पूर्व राष्ट्रपति डॉ राधाकृष्णन सामने आए हम लोगों ने बीएचयू का कुलगीत गाना शुरू कर दिया और राष्ट्रपति महोदय की सहृदयता कि वह तुरंत रुक गए और खुद आकर उन्होंने मुलाकात भी की थी। बताया कि बीएचयू के पूर्व कुलपति और राष्ट्रपति होने के बाद भी राधा कृष्णन जी का व्यक्तित्व देख हम सभी प्रसन्न हो गए। उस समय टीम के साथ प्रो एएस रतूरी डीन ऑफ स्टूडेंट, पुष्पी प्रताप प्रवक्ता वीकेएम,छात्रा वीकेएम विद्युत, ममता चक्रबर्ती सहित अन्य लोग भी रहे।
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें