इसके अलावा दीवार के पास ही एक पत्थर की आकृति भी मिली है। यह आकृति क्या है, इसकी जांच के बाद भी कुछ कहना ठीक होगा। खुदाई में हर एक दिन नई-नई जानकारियां और अहम पुरावशेष मिल रहे हैं। इसकी जानकारी होने के बाद यहां आसपास के महाबन, औढ़े आदि गावों के साथ ही शहरी क्षेत्र से भी कुछ लोग भी पहुंचने लगे हैं।
अब तक ये मिले सामान-
गुप्तकालीन भट्ठी
लौह सामग्रियां
देवी-देवताओं की मूर्तियां
मंदिर के संकेत
शिवलिंग
पत्थर के टुकड़े
दीवार
ग्राम तीनकेणवा में टीले के भी प्राचीनतम होने का अनुमान है। एक दशक पहले यहां पुरातात्विक अवशेष मिले थे। तत्कालीन जिलाधिकारी से जांच की मांग की गई थी। -नीरज पांडेय पूर्व ग्राम प्रधान ढढोरपुर
महावन गोपाल सिंह ने बताया कि गांव में भी प्राचीन मूर्तियां और पुरावशेष मिलते रहे हैं। बभनियाव के बाद गांव के हजारों वर्ष पुराने होने की बात सच लगने लगी। महावन में भी खुदाई कराकर इसका पता लगाना चाहिए। कमलापति दुबे पनियरा ने बताया कि क्षेत्र के तमाम गांव प्राचीन धरोहर तथा आदिकालीन सभ्यता से जुड़े हुए हैं। गांव में मिल रहे अवशेष काशी की नई कहानी लिखेंगे।
पनियारा में भी टीले पर अक्सर प्राचीन अवशेष मिलते रहे हैं। पूर्व शोध छात्र डॉ. अवधेश सिंह कहा कहना है कि मरूई गांव के में पुरातात्विक तरीके से खुदाई और अध्ययन किया जाए तो प्राप्त सामग्री के आधार पर मौर्य काल के पीछे तक की ऐतिहासिकता साबित हो सकती है।