बीएचयू कैंपस में नया सत्र शुरू होते ही विश्वविद्यालय प्रशासन ने कड़ा फैसला लेकर घटनाओं पर अंकुश लगाने की कोशिश की है। बीएचयू प्रशासन ने प्रवेश प्रक्रिया के बीच अलग-अलग संकायों और विभागों में 56 छात्रों को दोबारा प्रवेश पर रोक लगा दी गई है। इन पर पिछले तीन साल में घटी घटनाओं को आधार बनाते हुए कार्रवाई की गई।
छात्रों के निलंबन के साथ ही इन्हें प्रवेश सहित अन्य सुविधाओं से वंचित करते हुए इसकी सूचना संबंधित संकायों, विभागों के प्रमुख, परीक्षा नियंत्रक आदि को भी दी गई है। उधर, इस कार्रवाई को लेकर छात्रों में गुस्सा है और वह इसके लिए कुलपति से मिलने के साथ ही आंदोलन की तैयारी कर रहे हैं। कुलसचिव कार्यालय की ओर से इसका आदेश 16 जुलाई को ही जारी किया जा चुका है।
इसमें एक अक्तूबर 2016 को बीएचयू अस्पताल में मारपीट के मामले में चार छात्रों का नाम शामिल है। 31 अगस्त 2016 में ट्रॉमा सेंटर में हुई मारपीट के मामले में 16 छात्रों को निलंबित किया गया है। 22 जनवरी 2016 को शोध छात्रा के साथ यौन उत्पीड़न में अंग्रेजी विभाग के पूर्व शोध छात्र और आईएमएस में हुई एक घटना में एक छात्र पर कार्रवाई करने का भी जिक्र है।
इसके अलावा सात अप्रैल 2017 को दर्शनशास्त्र विभाग के गेट पर मारपीट मामले में 16 छात्रों का निलंबन, मारपीट के एक अन्य मामले में चार छात्र, 26 दिसंबर 2017 को हुई घटना के मामले में लोक संपत्ति क्षति निवारण अधिनियम के तहत 14 छात्रों को निलंबित करने का आदेश जारी हुआ है।
उप कुलसचिव (शिक्षण) की ओर से छात्रों की सूची सभी संस्थानों के निदेशक, संकाय प्रमुख, विभागाध्यक्ष, कॉलेजों के प्रिंसपल, परीक्षा नियंत्रक, चीफ प्रॉक्टर को भी भेजी गई है।
बीएचयू की चीफ प्रॉक्टर प्रो. रोयाना सिंह ने कहा कि पूर्व में हुई घटनाओं में जांच समिति की रिपोर्ट के आधार पर ही ये कार्रवाई हुई है। इससे छात्रों को सबक लेना चाहिए। कैंपस का माहौल अशांत करने वालों पर दंडात्मक कार्रवाई होगी। इसलिए छात्रों को इस तरह की गतिविधियों में संलिप्तता से बचना चाहिए।