हर-हर महादेव के जयघोष के बीच भगवान शिव की बरात निकली तो पूरा माहौल शिवमय हो उठा। भूत, पिशाच, गंधर्व, किन्नर, देव नाचते गाते और भस्मी रमाए रवाना हुए। आगे-आगे भूतों की टोली और पीछे शिवभक्तों का रेला। विशालकाय नंदी के पीछे सुर-असुरों का समूह नाचते-गाते चल रहा था। दूल्हे के वेश में भूतभावन महादेव डमरू बजाते हुए चल रहे थे।
बृहस्पतिवार को साकेत मंडप के प्रांगण में शिवमहापुराण कथा ज्ञान यज्ञ के सातवें दिन शिव पार्वती विवाह का आयोजन हुआ। शिव बरात का स्वरूप देखकर शिवभक्त भी उल्लास में डूबे नजर आए। हर-हर महादेव के जयकारे के बीच जैसे ही भगवान शिव ने माता पार्वती के गले में हार डाला, देवगण शंखनाद करते हुए प्रभु की युगल छवि को एकटक निहारते रहे। कथा स्थल पर उपस्थित हजारों की संख्या में श्रद्धालु इस नयनाभिराम दृश्य को अपने अपलक नेत्रों में सदा सदा के लिए संचित करने को आतुर नजर आ रहे थे।
त्रिदेव मंदिर के 14वें स्थापना दिवस समारोह पर शिवमहापुराण कथा कहते हुए गिरी बापू महाराज ने कहा कि महादेव सबसे सरल और सहज देव हैं जो करुणानिधान हैं, उन्हें किसी दिखावे की आवश्यकता नहीं, वे तो सिर्फ भाव के भूखे हैं। गिरी बापू ने काशी महात्म्य बताते हुए कहा कि महादेव काशी के मध्य में मध्यमेश्वर नाम से विराजमान हैं। व्यास जी ने कहा है कि मध्यमेश्वर महादेव सामवेद का गायन करते हैं। सातवें दिन की कथा का शुभारंभ यजमान परिवार द्वारा व्यासपीठ के पूजन से हुआ। प्रेमलता सिकरिया, नारायण सिकरिया, परमानंद सिकरिया ने सपरिवार आरती उतारी। इस दौरान भरत सराफ, राधेगोविंद केजरीवाल, डॉ. राजेश मिश्रा, अनूप सराफ, सज्जन सिंघी, उमाशंकर पोद्दार, सुरेश तुलस्यान, श्याम बूबना, विजय मोदी, पवन अग्रवाल आदि मौजूद रहे।