ये होता है नुकसान-
काढ़े का अधिक सेवन करने से चक्कर आना, पेट और सीने में जलन, मुंह में छाला शरीर में जगह-जगह दाने उभरने जैसी समस्याओं के होने का खतरा रहता है। ऐसा इसलिए क्योंकि इसमे प्रयोग वाले अधिकांश सामानों की तासीर गर्म होती है। इसी वजह से इसका सेवन डॉक्टर की सलाह पर ही करें तो ठीक रहेगा।
राजकीय आयुर्वेदिक कॉलेज की प्राचार्य प्रो नीलम गुप्ता का कहना है कि आयुष काढ़ा शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाने के लिए सहायक है। हॉस्पिटल में भर्ती मरीजों को भी दिया जा रहा है लेकिन आम लोगों को बिना डॉक्टर की सलाह के सेवन नहीं करना चाहिए। अगर कोई घर पर काढ़ा बना रहा है तो उसे यह भी देखना होगा कि इसकी मात्रा जितनी बताई गई है। उससे ज्यादा न हो, नहीं तो आगे चलकर नुकसानदेह भी हो सकता है।
बीएचयू के आयुर्वेद संकाय के वैद्य सुशील दूबे ने कहा कि आयुष काढ़े में दालचीनी, गिलोय सहित कई आयुर्वेदिक औषधियों के साथ ही किचन में प्रयोग होने वाले मसालों का भी इस्तेमाल होता है। जब एलोपैथी दवा बिना डॉक्टर के नहीं लेते हैं तो बिना डॉक्टर की सलाह आयुर्वेदिक दवाओं, काढ़ा का सेवन नहीं करना चाहिए।