आतंकी आरिज का परिवार शिक्षित है। पिता जफरे आलम की 2009 में मौत हो चुकी है तो एक चाचा बदरे आलम आईएएस रह चुके हैं। दूसरे चाचा डॉ. फकरे आलम परिवार के साथ कोट/बाजबहादुर मोहल्ले में स्थित आवास पर रहते हैं और गांव नसीरपुर में डिस्पेंसरी चलाते हैं। चाचा की इसी डिस्पेंसरी पर आरिज का भाई साबिज भी रहता है।
एक अन्य भाई शारिक दिल्ली में प्राइेवट नौकरी करता है। 2018 में आरिज की नेपाल बार्डर से गिरफ्तारी के बाद से ही परिजनों ने उसके मुद्दे पर चुप्पी साध रखी है। शहर से लेकर नसीरपुर गांव स्थित घर पर पूरी तरह से खामोशी छा गई है। सुबह से ही परिवार के लोग कोर्ट के फैसले पर नजर रखे थे। गिरफ्तारी के पूर्व उस पर 15 लाख का इनाम भी घोषित था। आरिज की मां भी शहर के बाजबहादुर मोहल्ला स्थित आवास पर रहती हैं।
इंजीनियरिंग की पढ़ाई के दौरान गलत लोगों के संपर्क में आया
बाटला हाउस कांड के बाद चर्चा में आया आरिज उर्फ जुनैद शुरू से ही होशियार था। इंजीनियरिंग की पढ़ाई करने के दौरान उसका संपर्क कुछ ऐसे लोगों से हो गया, जो देश विरोधी गतिविधियों में लिप्त थे।