मौनी अमावस्या पर श्रद्धालु गंगा के तट पर पुण्य की डुबकी लगाएंगे। घाटों पर श्रद्धालुओं की भीड़ को ध्यान में रखते हुए बैरिकेडिंग के साथ ही पुलिस को अलर्ट किया गया है। एक फरवरी और दो फरवरी को शहर में भारी वाहनों का प्रवेश भी सोमवार की देर रात के बाद से नहीं होगा। गंगा घाटों पर स्नान को उमड़ने वाली भीड़ को देखते हुए पुलिस फोर्स की अतिरिक्त व्यवस्था की गई है।
रविवार को घाटों पर बैरिकेडिंग कराते हुए जल पुलिस और एनडीआरएफ को भी अलर्ट किया गया है। पुलिस अधिकारियों ने घाटों पर व्यवस्थाओं का निरीक्षण किया। डीसीपी काशी आरएस गौतम के अनुसार सुरक्षा व्यवस्था के बाबत सादे वेश में भी पुलिसकर्मियों को घाटों पर तैनात किया गया है, जो संदिग्धों की गतिविधियों पर नजर रखेंगे। माघ मास की अमावस्या 31 जनवरी को पड़ रही है लेकिन उदय व्यापिनी होने के कारण मौनी अमावस्या एक फरवरी को मनाई जाएगी। मौनी अमावस्या पर भौमवती अमावस्या का दुर्लभ संयोग निर्मित हो रहा है। ज्योतिषाचार्य दैवज्ञ कृष्ण शास्त्री ने बताया कि माघ की अमावस्या तिथि 31 जनवरी को दोपहर 1.15 बजे लग रही है और एक फरवरी को सुबह 11.16 बजे तक रहेगी।
मैदागिन-गोदौलिया के बीच नो व्हीकल जोन
एडीसीपी ट्रैफिक डीके पुरी के अनुसार मैदागिन-चौक-गोदौलिया के बीच नो व्हीकल जोन रहेगा। हर प्रकार की सवारी गाड़ी रिक्शा, तांगा, सायकिल आदि को मैदागिन से आगे नहीं जाने दिया जाएगा। इन वाहनों को हरिश्चंद्र डिग्री कालेज के सामने या टाउन हॉल में पार्क कराया जाएगा। वहीं लहुराबीर से गोदौलिया की ओर जाने वाली सभी प्रकार के वाहनों को बेनिया तिराहे पर रोका जाएगा और इन वाहनों को पियरी मार्ग कबीर चौरा व लहुराबीर वापस मोड़ते हुए निकाला जाएगा। यह वाहन बेनिया पार्किंग में पार्क किए जाएंगे।
मौन रखकर स्नान करने से मिलता है गोदान का पुण्य
काशी विद्वत परिषद के महामंत्री प्रो. रामनारायण द्विवेदी ने बताया कि प्रात: काल मौन रख कर स्नान-ध्यान से सहस्र गोदान का पुण्य फल प्राप्त होता है। वैसे मौनी अमावस्या पर स्नान के बाद दान का भी विशेष महत्व होता है। दान में भूमि, स्वर्ण, अश्व, गज दान के साथ ही आम जनमानस तिल से बनी सामग्री, उष्ण वस्तुएं, कंबल स्वेटर, शाक-सब्जी दान से भी विशेष पुण्य लाभ होता है। इस दिन साधु-महात्मा व ब्राह्मणों के लिए अग्नि प्रज्वलित करनी चाहिए। उन्हें कंबल आदि जाड़े के वस्त्र देने चाहिए।