वाराणसी। दो साल के शोध के बाद वनवर्धनिक विंध्य क्षेत्र की ओर से पूर्वांचल के मौसम के अनुकूल बांस की पांच प्रजातियों को तैयार किया गया। इसमें मऊ, झांसी, मिर्जापुर सहित बनारस स्थित वन विभाग की नर्सरियों में 20 हजार पौधे तैयार किए गए हैं। बांस की खेती के लिए किसानों को तीन साल तक 75 रुपये प्रति पौध अनुदान भी मिलेगा।
पेड़ों की कटाई पर अंकुश लगाने, पेपर और फर्नीचर उद्योग को रफ्तार देने के लिए बांस की खेती किसानों के लिए एक मुनाफे का विकल्प हो सकती है। बांस की खेती से न सिर्फ किसानों की आमदनी बढ़ेगी, इससे छुट्टा पशुओं और अन्य जानवरों से होने वाले नुकसान से भी निजात मिलेगी। बांस का प्रयोग सौंदर्य प्रसाधन बनाने से लेकर दवाई, धूपबत्ती, छोटे बडे़ दौरी सूप आदि में होता है। इसके लिए रामनगर स्थित वनवर्धनिक विंध्य क्षेत्र मंडल की ओर से पांच प्रजाति के बांस के पौधे तैयार किए गए हैं। इसे बनारस सहित आसपास के जिलों के किसान अपने खेतों में या मेड़ पर लगा सकते हैं।
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ये है बांस की पांच प्रजातियां
कांटा बास, बालकोवा, बंबुसा नुतन, डेंड्रोक्लामस गिगानट्स और डेंड्रोक्लामस हामिल्टोनी बांस की प्रजातियां को यूपी के पर्यावरण के अनुकूल माना गया। इसे किसान अपने खेतों में लगाकर अच्छा मुनाफा कमा सकते हैं।
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वर्जन
नेशनल बांबू मिशन के तहत किसानों को बांस की खेती पर अनुदान की योजना है। जो किसान बांस की खेती करना चाहता है वह विभाग की नर्सरी से पौधे प्राप्त कर सकते हैं। किसान चार बीघा में 400 पौधे लगा सकते हैं। इसकी देखरेख और निगरानी के लिए प्रति पौध के हिसाब तीन साल तक 75 रुपये का अनुदान दिया जाएगा।
- महावीर कौजलगी, प्रभागीय वनाधिकारी