12 अक्तूबर 2005 को वाराणसी स्थित सेंट्रल जेल से आने के बाद वह पुन: हाजिर नहीं हुआ। अप्रैल 2006 से ही उसे भगोड़ा घोषित कर दिया गया था। 16 साल से वह पुलिस की गिरफ्त से बाहर था। इसी बीच शुक्रवार को मुखबिर की सूचना पर थानाध्यक्ष राजकुमार सिंह, उपनिरीक्षक शैलेंद्र पांडेय आदि ने गायघाट डाकबंगले से उसे गिरफ्तार कर लिया। थानाध्यक्ष राजकुमार सिंह ने बताया कि इसकी गिरफ्तारी के लिए एसटीएफ व एसओजी की टीम कई वर्षों से लगी थी। भगोड़े अनिल पर बलिया एसपी की तरफ से 25 हजार और वाराणसी पुलिस की ओर से 25 हजार का इनाम घोषित था।