कोटे की दुकान आवंटन की खुली बैठक के दौरान हुए बवाल व फायरिंग में जयप्रकाश पाल गामा की मौत हो गई थी। इस मामले में एक पक्ष के आठ नामजद व 25 अज्ञात के खिलाफ उसी दिन मुकदमा कायम कर लिया। दूसरे पक्ष की ओर से पुलिस ने केस दर्ज नहीं किया।
इसके बाद धीरेंद्र प्रताप के भाई आरोपित नरेंद्र प्रताप सिंह की पत्नी आशा प्रताप सिंह ने बृहस्पतिवार को अपर सिविल जज (जूनियर डिविजन) चतुर्थ/ न्यायायिक मजिस्ट्रेट अविनाश कुमार मिश्र की अदालत में वाद दाखिल किया। शुक्रवार को इस मामले में सुनवाई करते हुए न्यायालय ने 21 नामजद व 25-30 अज्ञात के खिलाफ केस दर्ज कर जांच करने का आदेश दिया।
पीड़िता आशा प्रताप सिंह ने प्रार्थना पत्र में उल्लेख किया है कि 15 अक्तूबर को करीब एक बजे दिन में दुर्जनपुर गांव में कोटे की दुकान के आवंटन के लिए एसडीएम बैरिया की अध्यक्षता में खुली बैठक हो रही थी। इस दौरान किसी कारणवश बैठक को निरस्त कर दिया गया। चुनाव निरस्त होने के बाद मेरे घर के सभी लोग अपने घर के लिए चल दिए।
उसी समय पुरानी रंजिश को लेकर मारपीट की नीयत से घात लगाए बैठे प्रधान समेत 21 नामजद और उनके अलावा अज्ञात 25 से 30 लोग गोलबंद होकर हमला कर दिए। पीड़िता ने कहा कि लाठी, डंडा, लोहे की राड और असलहा से लैस होकर जान से मारने की नीयत से मेरे और मेरे परिवार के लोगों पर हमला कर दिया। कुछ लोगों ने ईंट पत्थर भी चलाया। जिसमें मैं एवं जेठानी गंभीर रूप से घायल हो गए और बेहोश होकर जमीन पर गिर गई।
बलिया हत्याकांड में हुई मारपीट
अरोप है कि नरेंद्र प्रताप सिंह को जान से मारने की नीयत से ग्राम प्रधान ने असलहा से धुआंधार फायर किया और लोगों ने लाठी, डंडा और राड से मारकर घायल कर दिया। हमलावरों द्वारा परिवार के अजय सिंह एवं धर्मेंद्र सिंह को गंभीर रूप से मारा पीटा गया, जिनका इलाज वाराणसी में चल रहा है।
इसके अलावा मारपीट में रेखा, सरोज, आराधना सिंह, कांति सिंह, राज सिंह के हाथ पैर भी टूट गए। आरोप लगाया है कि हमलावर असलहा दिखाकर जान से मारने की धमकी देते रहे। इस दौरान धीरेंद्र सिंह उर्फ डब्ल्यू को भी गंभीर चोटें आई।