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भगवान भोलेशंकर की कृपा से मिला है पुरस्कारः पं. छन्नू लाल मिश्र

Sun, 26 Jan 2020 03:26 PM IST
स्‍वाधीन तिवारी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी
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पंडित छन्नूलाल मिश्र को मिठाई खिलाता उनका भांजा - फोटो : amar ujala
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पद्म विभूषण सम्मान की घोषणा के बाद पं. छन्नू लाल मिश्र ने कहा कि काशी कबहु ना छोड़िए विश्वनाथ दरबार...। मुझे काशी अतिप्रिय है और मैंने काशी को अभी तक नहीं छोड़ा। बाबा विश्वनाथ सभी के गुरु हैं और उनकी ही कृपा से यह सम्मान मिला है।

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मुझे बड़ी प्रसन्नता हुई कि मुझे इतना बड़ा अवार्ड मिला। यह काशी के संगीत घराने का सम्मान है। हम सरकार को बधाई देते हैं। अब तो आशीर्वाद देने की उम्र हो गई है। सब लोग आगे बढ़ें, हमारा देश आगे बढ़े और सभी लोग प्रसन्न रहें यही हमारा आशीर्वाद है।

पद्म भूषण के बाद मिला पद्म विभूषण सम्मान

पद्मभूषण के बाद पद्मविभूषण सम्मान की घोषणा से बनारस घराने के सम्मान में बढ़ोत्तरी हुई है। 3 अगस्त 1936 को आजमगढ़ में जन्मे पंडित छन्नूलाल मिश्रा को वर्ष 2010 में पद्मभूषण और संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार व यश भारती से भी सम्मानित किया जा चुका है। छन्नूलाल मिश्रा ऑल इंडिया रेडियो और दूरदर्शन में शीर्ष ग्रेड कलाकार रह चुके हैं। वह संस्कृति मंत्रालय के सदस्य भी हैं।

उनके दादा गुदई महाराज शांता प्रसाद प्रसिद्ध संगीतकार थे। छह साल की उम्र से ही पं. मिश्र ने अपने पिता बद्री प्रसाद मिश्र से संगीत की शिक्षा लेनी शुरू कर दी थी। किराना घराने के उस्ताद अब्दुल गनी खान से भी उन्होंने शिक्षा ली। सम्मान की घोषणा के बाद काशी के संगीत समाज में भी खुशी की लहर है।

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सर्जन प्रो. एनएन खन्ना - फोटो : amar ujala

मरीजों की सेवा ही मेरा धर्मः प्रो. एनएन खन्ना

पद्मश्री सम्मान पाने वालों में वाराणसी शहर के जाने माने सर्जन प्रो. एनएन खन्ना का नाम भी शामिल है। बातचीत में प्रो. खन्ना ने बताया कि मरीजों की सेवा ही धर्म है। जब तक जिंदगी रहेगी मरीजों की नि:शुल्क सेवा करता रहूंगा। बीएचयू में 1961 से 1993 तक सर्जरी विभाग में प्रोफेसर रहे खन्ना बीएचयू से 1993 में सेवानिवृत्ति के बाद से हर दिन माता आनंदमयी अस्पताल में नि:शुल्क सेवा दे रहे हैं। उधर बीएचयू सर्जरी विभाग में चिकित्सक और प्रो. खन्ना के सुपुत्र डॉ. राहुल खन्ना ने बताया कि प्रो. खन्ना के ही छात्र रहे देशभर में 100 से अधिक सर्जन आज मरीजों की सेवा कर रहे हैं।
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रमजान खान - फोटो : amar ujala

पिता की उपलब्धि से खुश हैं डॉ. फिरोज खान

बीएचयू के संस्कृत विद्या धर्म विज्ञान संकाय में असिस्टेंट प्रोफेसर पद पर नियुक्ति के बाद विवादों में आए डॉ. फिरोज खान पिता रमजान को पद्मविभूषण सम्मान मिलने से बहुत खुश हैं। राजस्थान निवासी फिरोज ने बताया कि पिताजी को लोग मुन्ना मास्टर के नाम से भी बुलाते हैं।

फिरोज ने बताया कि नियुक्ति के बाद से ही इतना तनाव मिला था कि उनके साथ-साथ पूरा परिवार दुखी था, अब इस उपलब्धि से बहुत खुशी हुई। कहा कि पिता रमजान गो सेवा के साथ-साथ हर दिन मंदिर में भजन भी गाते हैं। कहा कि यह गौरव की बात है कि पिताजी को यह सम्मान मिला। बताया कि दादाजी गफूर खान से ही पिताजी को कला-संगीत की सीख मिली।

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