हथियारबंद अपराधियों ने संभलने का मौका दिए बिना ही अवधेश राय पर ताबड़तोड़ गोलियां बरसाईं। पूरा इलाका गोलियों की तड़तड़ाहट से गूंज उठा था। इस घटना के बाद दहशत फैल गई थी। इससे पहले कि अजय राय कुछ कर पाते, हमलावर वहां से फरार हो गए। बदमाशों ने अत्याधुनिक हथियारों का प्रयोग किया और अवधेश के शरीर को गोलियों से छलनी कर दिया था। वो लहूलुहान होकर जमीन पर गिर पड़े थे। आननफानन अस्पताल ले जाया गया जहां उन्हें मृत घोषित कर दिया गया।
हत्या का आरोप माफिया मुख्तार अंसारी व उसके सहयोगियों पर लगा था। मृतक के भाई अजय राय की तहरीर पर हत्या का मुकदमा दर्ज हुआ था। केस की सुनवाई के दौरान जून 2022 में पता चला कि मूल केस डायरी ही गायब है। वाराणसी से प्रयागराज तक केस डायरी की तलाशी हुई। मूल केस डायरी नहीं मिली। इस मामले में पुलिस ने केस दर्ज कराया है। मूल केस डायरी के गायब कराने के मामले में मुख्तार अंसारी पर अपने प्रभाव का इस्तेमाल करने का आरोप लगा।
अवधेश राय हत्याकांड के दो आरोपियों कमलेश सिंह और पूर्व विधायक अब्दुल कलाम की मौत हो चुकी है। मामले के दो अन्य आरोपी राकेश न्यायिक और भीम सिंह हैं। इस प्रकरण की सुनवाई पहले बनारस के एडीजे कोर्ट में चल रही थी। 23 नवंबर 2007 को सुनवाई के दौरान अदालत से चंद कदमों की दूरी पर बम ब्लास्ट हुआ। आरोपी राकेश न्यायिक ने सुरक्षा का हवाला देकर हाईकोर्ट की शरण ली।
इसके बाद लंबे समय तक इस मुकदमे की सुनवाई पर रोक लगी रही। विशेष न्यायाधीश एमपी-एमएलए कोर्ट का गठन होने पर प्रयागराज में मुकदमे की सुनवाई फिर शुरू हुई। वाराणसी में एमपी-एमएलए की विशेष कोर्ट के गठन होने पर यहां मुख्तार अंसारी के खिलाफ सुनवाई शुरू हुई। राकेश न्यायिक और भीम सिंह की पत्रावली अभी भी प्रयागराज में ही लंबित है।