गुरुजी ने ही पुलिस कर्मियों को मदद करने पर तगड़े मुनाफे का लालच दिया था। रकम की एक बड़ी किश्त एक वाहन से आई, उसका पैसा गिन कर जाने दिया गया। दूसरे वाहन से रकम की जो किश्त आई, उसमें पुलिस को मिलने वाले पैसे को लेकर पुलिसकर्मियों में ही मतभेद हो गया। इसी के बाद बात बिगड़ गई और मामला उच्चाधिकारियों तक पहुंच गया। फिलहाल, इस पूरे प्रकरण को लेकर कमिश्नरेट के थानेदारों से लेकर अफसरों तक जितने मुंह उतने तरह की बातें की जा रही हैं। सभी की निगाहें इस ओर लगी हैं कि पुलिस आयुक्त को डीसीपी काशी जोन जांच रिपोर्ट क्या देंगे और कार्रवाई की जद में कौन-कौन आएगा।
हवाला की बड़ी रकम के हेरफेर में भेलूपुर थाने की पुलिस की मिलीभगत का मामला सामने आने पर कमिश्नरेट के अफसरों ने इंस्पेक्टर रमाकांत दुबे को फटकार लगाई। पुलिस ने आनन-फानन गुरुजी को पकड़ा और यथासंभव नकदी बरामद कर न जाने किसके कहने पर उसे छोड़ दिया। वही, गुरुजी अब पुलिस के गले की फांस बन गया है।
पुलिस सूत्रों ने बताया कि इस पूरे प्रकरण में लाइन हाजिर किए गए इंस्पेक्टर भेलूपुर रमाकांत दुबे एक ओर हैं और उनके साथ पैसे के हेरफेर में शामिल अन्य पुलिसकर्मी दूसरे पाले में हैं। पुलिसकर्मियों का कहना है कि उन्हें कुछ भी जानकारी नहीं थी। उनके थाना प्रभारी उन्हें निर्देशित किया तो वह उनके निर्देश के क्रम में अपनी ड्यूटी समझ कर उनके साथ गए थे। वहीं, इस पूरे प्रकरण में कुछेक अफसरों की भूमिका भी संदिग्ध बताई जा रही है। हालांकि हकीकत क्या है, यह डीसीपी काशी जोन आरएस गौतम की जांच रिपोर्ट में ही स्पष्ट होगा।
इस प्रकरण में प्रथम दृष्टया लापरवाही बरतने के आरोप में इंस्पेक्टर भेलूपुर रमाकांत दुबे को लाइन हाजिर कर दिया गया। इसके साथ ही खोजवा चौकी प्रभारी सुशील कुमार को कोतवाली थाने से संबद्ध कर पुलिस आयुक्त मुथा अशोक जैन ने पूरे प्रकरण की जांच डीसीपी काशी जोन आरएस गौतम को सौंप कर रिपोर्ट तलब की है। वहीं, इस संबंध में भेलूपुर थाने के पुलिस कर्मियों और काशी जोन के अफसरों ने चुप्पी साध रखी है। यह जरूर है कि दबी जुबान इस मसले को लेकर पूरे कमिश्नरेट के पुलिस कर्मियों से लगायत अफसरों तक खासी चर्चा है। सभी का गुपचुप यही कहना है कि बड़े पैमाने पर हवाला के पैसे का लेनदेन हुआ है और इसकी जानकारी लखनऊ तक के महकमे के वरिष्ठ अफसरों को है।