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Varanasi: ‘गुरुजी’ के प्रभाव में आकर पुलिस ने कराई फजीहत, लावारिस कार में मिले 92.94 लाख का नहीं खुला भेद

Mon, 05 Jun 2023 12:46 PM IST
उत्पल कांत न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी

सार

वाराणसी के शंकुलधारा पोखरे के समीप लावारिस कार की डिग्गी में 92 लाख 94 हजार 600 रुपये कौन छोड़ गया, इसे लेकर राज बरकरार है। प्रकरण को लेकर कमिश्नरेट के पुलिस कर्मियों से लेकर अफसरों तक हड़कंप की स्थिति है और तगड़ी रकम के हेरफेर की बात कही जा रही है।
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वाराणसी पुलिस कमिश्नरेट - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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वाराणसी के खोजवा स्थित शंकुलधारा पोखरे के समीप लावारिस कार की डिग्गी में मिले 92.94 लाख रुपये के मामले में सारनाथ क्षेत्र के एक शख्स की ही अहम भूमिका सामने आई है। खुद को एक संगठन का प्रमुख बताने वाला यह शख्स पुलिस महकमे में थानेदारों से लेकर अफसरों के बीच ‘गुरुजी’ के नाम से चर्चित था।

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पुलिस महकमे में उसने ऐसी हनक बना रखी थी कि उसका फोन आने के बाद उसकी बात मानने से कोई इंकार ही नहीं करता था। फिलहाल वह अपने सभी मोबाइल स्विच ऑफ कर और घर छोड़ कर गायब है। पुलिस उसकी तलाश में उसके संभावित ठिकानों पर दबिश रही है।

भेलूपुर थाना क्षेत्र के खोजवा स्थित शंकुलधारा पोखरे के समीप खड़ी एक लावारिस कार की डिग्गी से 92 लाख 94 हजार 600 रुपये मिलने का दावा पुलिस ने किया था। इस प्रकरण को लेकर कमिश्नरेट के पुलिस कर्मियों से लेकर अफसरों तक हड़कंप की स्थिति है और तगड़ी रकम के हेरफेर की बात कही जा रही है। पुलिस सूत्रों का कहना है कि गुरुजी की ही सूचना पर हवाला की तगड़ी रकम का खोजवा क्षेत्र से हेरफेर हुआ था।
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जितने मुंह उतने तरह की बातें

गुरुजी ने ही पुलिस कर्मियों को मदद करने पर तगड़े मुनाफे का लालच दिया था। रकम की एक बड़ी किश्त एक वाहन से आई, उसका पैसा गिन कर जाने दिया गया। दूसरे वाहन से रकम की जो किश्त आई, उसमें पुलिस को मिलने वाले पैसे को लेकर पुलिसकर्मियों में ही मतभेद हो गया। इसी के बाद बात बिगड़ गई और मामला उच्चाधिकारियों तक पहुंच गया। फिलहाल, इस पूरे प्रकरण को लेकर कमिश्नरेट के थानेदारों से लेकर अफसरों तक जितने मुंह उतने तरह की बातें की जा रही हैं। सभी की निगाहें इस ओर लगी हैं कि पुलिस आयुक्त को डीसीपी काशी जोन जांच रिपोर्ट क्या देंगे और कार्रवाई की जद में कौन-कौन आएगा।

फटकार के बाद गुरुजी को थाने लाकर छोड़ा गया

हवाला की बड़ी रकम के हेरफेर में भेलूपुर थाने की पुलिस की मिलीभगत का मामला सामने आने पर कमिश्नरेट के अफसरों ने इंस्पेक्टर रमाकांत दुबे को फटकार लगाई। पुलिस ने आनन-फानन गुरुजी को पकड़ा और यथासंभव नकदी बरामद कर न जाने किसके कहने पर उसे छोड़ दिया। वही, गुरुजी अब पुलिस के गले की फांस बन गया है।

इंस्पेक्टर एक तरफ और अन्य पुलिसकर्मी दूसरे तरफ

पुलिस सूत्रों ने बताया कि इस पूरे प्रकरण में लाइन हाजिर किए गए इंस्पेक्टर भेलूपुर रमाकांत दुबे एक ओर हैं और उनके साथ पैसे के हेरफेर में शामिल अन्य पुलिसकर्मी दूसरे पाले में हैं। पुलिसकर्मियों का कहना है कि उन्हें कुछ भी जानकारी नहीं थी। उनके थाना प्रभारी उन्हें निर्देशित किया तो वह उनके निर्देश के क्रम में अपनी ड्यूटी समझ कर उनके साथ गए थे। वहीं, इस पूरे प्रकरण में कुछेक अफसरों की भूमिका भी संदिग्ध बताई जा रही है। हालांकि हकीकत क्या है, यह डीसीपी काशी जोन आरएस गौतम की जांच रिपोर्ट में ही स्पष्ट होगा।
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इस मामले में अबतक हुई कार्रवाई

 इस प्रकरण में प्रथम दृष्टया लापरवाही बरतने के आरोप में इंस्पेक्टर भेलूपुर रमाकांत दुबे को लाइन हाजिर कर दिया गया। इसके साथ ही खोजवा चौकी प्रभारी सुशील कुमार को कोतवाली थाने से संबद्ध कर पुलिस आयुक्त मुथा अशोक जैन ने पूरे प्रकरण की जांच डीसीपी काशी जोन आरएस गौतम को सौंप कर रिपोर्ट तलब की है। वहीं, इस संबंध में भेलूपुर थाने के पुलिस कर्मियों और काशी जोन के अफसरों ने चुप्पी साध रखी है। यह जरूर है कि दबी जुबान इस मसले को लेकर पूरे कमिश्नरेट के पुलिस कर्मियों से लगायत अफसरों तक खासी चर्चा है। सभी का गुपचुप यही कहना है कि बड़े पैमाने पर हवाला के पैसे का लेनदेन हुआ है और इसकी जानकारी लखनऊ तक के महकमे के वरिष्ठ अफसरों को है। 
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