वाराणसी कमिश्नरेट पुलिस की क्राइम ब्रांच ने बुधवार रात बघेल को बाराबंकी से हिरासत में लिया था। प्राथमिकी में जिक्र किया गया है कि सांसद अतुल राय के खिलाफ दर्ज दुष्कर्म के मामले में दंड से बचाने के लिए लोकसेवक अमरेश सिंह ने अपूर्ण व निराधार अभिलेखों की रचना की।
साथ ही मिथ्या साक्ष्यों के आधार पर मुख्य आरोपी अतुल राय को जांच में लाभ पहुंचाने के आशय से दोषपूर्ण रिपोर्ट तैयार की। इसी से क्षुब्ध होकर दुष्कर्म पीड़िता व गवाह ने आत्मदाह कर लिया। पीड़िता की ओर से सोशल मीडिया पर भी अमरेश को दोषी बताया गया था।
मुकदमा दर्ज होने के बाद पुलिस ने बघेल को गिरप्तार कर लिया। बघेल इसी मामले में 9 महीने से निलंबित चल रहे हैं। बुधवार को प्रयागराज में एमपी-एमएलए कोर्ट में हाजिर होकर वाराणसी के भेलूपूर सर्किल के तत्कालीन इंचार्ज बघेल ने अतुल राय के पक्ष में बयान दे दिया था। कोर्ट में सरकार के खिलाफ बयान देने पर शीर्ष स्तर पर अधिकारियों ने नाराजगी जाहिर की थी।
अतुल राय पर दुष्कर्म का आरोप लगाने वाली पीड़िता और गवाह युवक ने 16 अगस्त को नई दिल्ली में सुप्रीम कोर्ट के सामने आत्मदाह कर लिया था। पीड़िता और उसके साथी गवाह युवक ने वाराणसी के तत्कालीन पुलिस अधिकारियों और न्यायाधीश पर गंभीर आरोप लगाते हुए फेसबुक लाइव भी किया था।
मामले की जांच के लिए डीजी भर्ती बोर्ड राज कुमार विश्वकर्मा की अध्यक्षता में एसआईटी का गठन किया गया था। एसआईटी की रिपोर्ट के आधार पर तत्कालीन अपर पुलिस अधीक्षक विकास चंद्र त्रिपाठी के खिलाफ विभागीय कार्रवाई के आदेश जारी किए गए थे।
बुधवार को बघेल के न्यायालय में हाजिर होकर दिए गए बयान के बाद इस मामले ने दोबारा तूल पकड़ लिया। इसके बाद मुकदमा दर्ज कर बघेल को गिरफ्तार कर लिया गया और विकास चंद्र त्रिपाठी को निलंबित कर दिया गया।