फिल्मों में आमतौर पर खलनायक की पहचान रखने वाले आशुतोष राणा को रावण का किरदार पसंद है। उन्होंने रामलीला में रावण का एक्ट किया तो फिल्म रामायण एपिक में रावण के लिए आवाज दी। अमर उजाला संवाद में उन्होंने राम और रावण का अंतर बताया। ....
घाटों-गलियों के लिए मशहूर बनारस की बनावट और इसकी आध्यात्मिक महिमा की तमाम व्याख्याएं की जा चुकी हैं। आम तौर पर जहां इस शहर के बेतरतीब यातायात व्यवस्था को लेकर आलोचनाएं होती रहती हैं, वहीं फिल्म अभिनेता आशुतोष राणा की सोच इससे बिल्कुल उलट है।
उनकी नजर में इस शहर की बनावट-बसावट लोगों को अनुशासन का पाठ पढ़ाती है। वह उसके रस-रंग में डूबे नजर आते हैं। आशुतोष कहते हैं कि गलियों से गुजरते समय पता चलता है कि यहां के लोग कितने अनुशासित हैं। डेढ़ फीट की गली से तुमको भी मुझको भी निकलना है।
गुरु, ‘तुम पहले कि हम पहले’ जैसी बात नहीं होती। उनकी नजर में काया में जहां ईश्वर वास करे, उसे काशी कहते हैं। देश में सिर्फ एक ही स्थान मणिकर्णिका है, जहां अग्नि की शुचिता के चलते मोक्ष प्राप्त होता है।
बताते हैं- ये वो धरती है जिसने मुझे आगे बढ़ने की अंतिम सीढ़ी दी। बीए फाइनल ईयर में बीएचयू के यूथ फेस्टिवल में आया तो लगा कि मुझे एनएसडी जाना चाहिए।
सौभाग्य से काशी से चाहत के मुताबिक कॅरियर की सीढ़ी मिल गई। इसी जमीन से एनएसडी में जाने का मौका मिला। इस शहर का हर कोना निराला है। काशी मेरे लिए मोक्ष का द्वार है।
इस समय काशी में तेलुगू फिल्म की शूटिंग कर रहे राणा ‘अमर उजाला संवाद’ में शामिल हुए। उन्होंने हिंदी सिनेमा से लेकर सामाजिक सरोकारों, कालजयी किरदारों के साथ-साथ राजनीति पर बेबाकी से अपनी भावनाएं साझा कीं। प्रस्तुत हैं उनसे बातचीत के प्रमुख अंश...।