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अमर उजाला शिक्षा अभियान: वाराणसी में दूसरी, तीसरी कक्षा के बच्चों को अब शिक्षक दे रहे बेसिक शिक्षा का ज्ञान

Fri, 08 Apr 2022 02:08 PM IST
उत्पल कांत न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी

सार

कोरोना संक्रमण काल के दौरान  बच्चों की ऑनलाइन पढ़ाई के कारण हुए नुकसान की भरपाई के लिए शिक्षक अतिरिक्त प्रयास कर रहे हैं। 
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स्कूली शिक्षा - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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कोरोना संक्रमण काल के दौरान बेपटरी हुई शिक्षा व्यवस्था का दुष्प्रभाव बच्चों पर नजर आ रहा है। पहली, दूसरी और तीसरी कक्षाओं के बच्चों की स्थिति सबसे ज्यादा खराब है। बच्चों की लेखन क्षमता के साथ ही गणितीय ज्ञान, हिंदी, अंग्रेजी और सीखने की क्षमता प्रभावित हुई है। शिक्षकों ने बच्चों की स्थिति को सुधारने के लिए बेसिक स्तर की शिक्षा को फिर से देने की शुरुआत की है। 

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बच्चों की ऑनलाइन पढ़ाई के कारण हुए नुकसान की भरपाई के लिए शिक्षक अतिरिक्त प्रयास कर रहे हैं। दो साल घर में रहने के कारण बच्चों में लिखने और पढ़ने की आदतें एकदम बदली-बदली सी हैं। ऑफलाइन स्कूल शुरू होने के बाद जब शिक्षकों के सामने यह समस्या आई तो उन्होंने इसको चुनौती के रूप में स्वीकार किया। अब वह बच्चों की आधारभूत शिक्षा को मजबूत करने के लिए प्रयासरत हैं। 

मनोरंजक पढ़ाई से ही सुधरेंगे हालात

ऑनलाइन पढ़ाई से छात्रों के नुकसान की भरपाई के लिए शिक्षकों ने नए सत्र में अतिरिक्त कक्षाओं के संचालन का इंतजाम किया है। तनाव को दूर करने के लिए खेलकूद, गायन, वादन और योगा क्लास की गतिविधियां कराई जा रही हैं। खेल-खेल में पढ़ाई के जरिये छात्रों को स्कूलों से जोड़ा जा रहा है जिससे कि वह स्कूल आने में किसी तरह न हिचकें। इसके लिए शिक्षकों की भी कार्यशालाएं लगाई जा रही हैं। 

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नवप्रवेशी छात्रों को सिखाना चुनौती

सेवापुरी विकास खंड के डोमैला प्राथमिक स्कूल की सहायक अध्यापिका ज्योति भारद्वाज ने बताया की लॉकडाउन में नवप्रवेशी छात्र-छात्राओं को सिखाना बड़ी चुनौती थी। बच्चों को फिर से पुराने ढर्रे पर लाने में काफी मेहनत करनी पड़ रही है। अतिरिक्त गतिविधियों को स्कूली पाठ्यक्रम में शामिल करके बच्चों को स्कूल आने के लिए प्रेरित किया जा रहा है।

बच्चों की सीखने की क्षमता प्रभावित
आराजी लाइन विकास खंड के जगतपुर प्राथमिक विद्यालय की प्रधानाचार्य करुणा पांडेय ने बताया कि बच्चों में सीखने और लिखने की क्षमता प्रभावित हुई है और कई बच्चे स्कूल आने से भी कतरा रहे थे। इस समस्या को दूर करने के लिए अतिरिक्त गतिविधियों के साथ ही बच्चों को बेसिक ज्ञान देकर उनका आत्मविश्वास मजबूत किया जा रहा है।
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