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मील का पत्थर हैं नए कृषि सुधार कानूनः कृषि मंत्री सूर्य प्रताप शाही

Fri, 12 Feb 2021 12:43 AM IST
स्‍वाधीन तिवारी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी
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कृषि मंत्री सूर्य प्रताप शाही। - फोटो : अमर उजाला।
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प्रदेश के कृषि मंत्री सूर्य प्रताप शाही ने कहा कि देश को एकीकृत किए जाने और संरक्षित खेती को और बढ़ाने की आवश्यकता है। नई कृषि नीति की उत्पादकता को बढ़ाने में मोर क्रॉप पर ड्रॉप योजना महत्वपूर्ण होगी। आत्मनिर्भर भारत बनाने के लिए खेती में भी आत्मनिर्भर बनना पड़ेगा। केंद्र सरकार के तीनों कृषि सुधार कानून मील के पत्थर हैं। 

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वह गुरुवार को महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ के भैरव तालाब स्थित श्री बलवंत सिंह इंस्टीट्यूट ऑफ एग्रीकल्चर साइंस एंड टेक्नोलॉजी के तकनीकी खंड के लोकार्पण समारोह को बतौर मुख्य अतिथि संबोधित कर रहे थे।

कृषि मंत्री ने कहा कि काशी विद्यापीठ के छात्र रहे पूर्व प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री और विश्वविद्यालय की नींव डालने वाले राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की जो संकल्पना थी उसे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ पूरा कर रहे हैं। इन कानूनों से कृषि में जहां बदलाव आएगा वहीं कृषकों की आर्थिक समृद्धि बढ़ेगी।
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उन्होंने वैज्ञानिकों को धन्यवाद देते हुए कहा कि उत्तर प्रदेश गेहूं उत्पादन में पूरे देश में प्रथम स्थान पर है। जबकि धान में दूसरे स्थान पर हैं। दलहन और तिलहन में देश आत्म निर्भर बनने की ओर है। प्रदेश सरकार ने 2020-21 में 63 लाख मीट्रिक टन के रिकॉर्ड धान की खरीदारी की है।
 

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इतनी खरीदारी पिछली सरकारों ने पांच साल में भी नहीं की थी। पिछली सरकारों ने स्वामीनाथन रिपोर्ट को लागू किया होता, किसानों के हित का सोचा होता तो ढाई लाख से अधिक किसानाें ने आत्महत्या नहीं की होती। उन्होंने कृषि छात्रों को अध्ययन के बाद राष्ट्र निर्माण में लगने और बेहतर करने की शुभकामनाएं दीं। 

विवि जो प्रोजेक्ट भेजेगा, राज्य सरकार से मिलेगा सहयोग
कृषि मंत्री ने कुलपति से कहा कि विश्वविद्यालय की ओर से जो प्रोजेक्ट बनाकर भेजेंगे उसमें राज्य सरकार से सहयोग दिलवाया जाएगा। अध्यक्षता करते हुए कुलपति प्रो. टीएन सिंह ने कहा कि काशी विद्यापीठ स्वावलंबन, आत्मनिर्भरता को लेकर चला था जिसे विश्वविद्यालय पूरा कर रहा है।

क्षेत्रीय किसानों के साथ कांट्रैक्ट फार्मिंग कर नवीन कृषि तकनीकी को उनके खेतों तक पहुंचाएंगे। समारोह को प्रो. योगेंद्र सिंह, डॉ. हर्ष राज पांडेय ने संबोधित किया। धन्यवाद ज्ञापन कुलसचिव डॉ. साहब लाल मौर्य ने किया। 
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