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काशी के खास मंदिर: अगस्त्य ऋषि ने तपस्या के बाद स्थापित किया था शिवलिंग, पूजन से सौभाग्य का मिलता है वरदान

Thu, 01 Aug 2024 12:09 PM IST
अमन विश्वकर्मा अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी

सार

Varanasi News: भारत की धार्मिक राजधानी काशी मंदिरों की नगरी भी कही जाती है। इस नगरी का भगवान शिव से काफी जुड़ाव रहा है। जगह-जगह स्थापित शिवलिंग की खास कहानियां और मान्यताएं भी हैं। इन्हीं में से एक है अगस्त्येश्वर महादेव का मंदिर। आइए जानते हैं इस मंदिर की पौराणिक और आध्यात्मिक कहानी...
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अगस्त्येश्वर महादेव। - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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अगस्ति तीर्थे तत्रास्ति महाघौघ विघातकृत्, तत्र स्नात्वा प्रयत्नेन दृष्ट्वागस्तीचश्वरं विभुम्।। अगस्तिकुंडे च ततः संतर्प्य च पितामहान्, अगस्तिना समेतां च लोपामुद्रां प्रणम्य च।। सर्वपापविनिर्मुक्तः सर्वक्लेशविवर्जितः, गच्छेत्स पूर्वजैः सार्धं शिवलोकं नरोत्तमः।। 
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अर्थात् महान पापों के समूह को दूर करने वाला अगस्त तीर्थ है। एक उत्कृष्ट व्यक्ति जो वहां पवित्र स्नान करता है, भगवान अगस्त्येश्वर के दर्शन करता है, अगस्त कुंड में पितामहों का तर्पण करता है और महर्षि अगस्त के साथ माता लोपामुद्रा को नमन करता है, वह सभी पापों और सभी कष्टों से मुक्त हो जाता है। वह अपने पूर्वजों के साथ शिवलोक जाएगा।

गोदौलिया के निकट अगस्तकुंड मोहल्ले में अगस्त्येश्वर महादेव का मंदिर और अगस्त्य तीर्थ है। अगस्त्य ऋषि की तपस्या से प्रसन्न होकर भगवान शिव ने उन्हें दर्शन दिए और अगस्त्येश्वर महादेव के रूप में वहीं विराजमान हो गए। अगस्त्य ऋषि का वर्णन काशीखंड में भी मिलता है। 
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अगस्त्य ऋषि ने भगवान कार्तिक से काशी खंड की कथा का श्रवण किया था। अगस्त्य कुंड पर सभी जानवर और पशु-पक्षी एक साथ पानी पीते थे। ये देखकर देवता भी चकित हो गए। जब विंध्य पर्वत बढ़ने लगा तो देवताओं ने अगस्त्य ऋषि से प्रार्थना की।
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