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साल भर बाद उठा गम ए हुसैन का पहला जुलूस, नम हुईं आंखें

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साल भर के अंतराल के बाद जब इमाम ए हुसैन का ताबूत उठाया गया तो हर अजादार की आंखें नम हो उठीं। चेहल्लुम की पूर्व संध्या पर शिवाला से निकलकर इमाम हुसैन का जुलूस गंगा के तट पर समाप्त हुआ। जुलूस में अलम, ताबूत, ताजिया और दुलदुल की जियारत के साथ ही अजादारों ने इमाम की याद में नौहा मातम किया। शहर में रात भर मजलिस का दौर चलता रहा।
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सोमवार को शिवाला में इमाम हुसैन की शहादत के सिलसिले से पहला जुलूस हाजी आलिम हुसैन और ऋषि बनारसी के आवास से उठा। पिछले साल मुहर्रम का कोई जुलूस नहीं उठाया गया और और इस साल भी मुहर्रम पर एक महीना 19 दिन बाद जुलूस उठाने की अनुमति मिली। शिया समुदाय ने 50 अजादारों के साथ अंजुमन गुलजारिया अब्बास के जेरे इंतजाम जुलूस उठाया। जुलूस में शामिल नौजवान या हुसैन की सदाएं लगाते हुए चल रहे थे। शिवाला चौराहा से होेेते जुलूस कई शिवाला घाट पर पहुंचा। इसके पहले मजलिस को मौलाना मेराज हुसैन ने खिताब किया। ऋषि बनारसी, आलिम हुसैन और हाजी शमीम ने नौहाख्वानी की। चौहट्टा लाल खान में सलीम के निवास पर भी मजलिस और मातम का हुआ। अंजुमन आबिदिया के दर्द भरे नौहे सुनकर अजादारों की आंखें नम हो उठीं। रात 9 बजे नवाब एहतेशाम के निवास पर भी मजलिस हुई। रात भर शहर के कई इलाकों में मजलिस का सिलसिला जारी रहा। अंजुमन हैदरी ने नौहा मातम किया। काली महल में शिया मसिजद और हाशिम हुसैन रिजवी के इमामबाड़े पर अंतिम मजलिस हुई। शहनीला हसन ने मजलिस को खिताब किया। शिया जामा मस्जिद के प्रवक्ता हाजी फरमान हैदर ने बताया कि इमाम का चेहल्लुम 28 सितंबर को अकीदत से साथ मनाया जाएगा। जहां-जहां अनुमति मिली है वहां पर जुलूस सीमित लोगों के साथ उठाया जाएगा।
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