विधायक डॉ. नीलकंठ तिवारी ने कहा कि जंगमबाड़ी मठ वीर शैव संप्रदाय का नेतृत्व कर रहा है। यह आध्यात्म का केंद्र होने के साथ सनातन का प्रबल रक्षक है। देशभर के अनुयायियों के लिए इस पीठ पर दर्शन करने और बाबा विश्वनाथ का आशीर्वाद लेने आते हैं। उन्होंने ये बातें जगद्गुरु विश्वाराध्य जयंती महोत्सव पर शनिवार को जंगमबाड़ी मठ में विद्वत सम्मान समारोह में कहीं। जगद्गुरु डॉ. चंद्रशेखर शिवाचार्य महास्वामी व जगद्गुरु मल्लिकार्जुन शिवाचार्य महास्वामी ने बीएचयू के प्रो. विंध्येश्वरी प्रसाद मिश्र को जगद्गुरु विश्वाराध्य विश्वभारती पुरस्कार दिया।
उज्जैन के महर्षि पाणिनि संस्कृत विश्वविद्यालय की डॉ. पूजा मनमोहनोपाध्याय को कोडीमठ संस्कृत साहित्य, केंद्रीय तिब्बती उच्च संस्थान के विभागाध्यक्ष डॉ. गेशे लोबसंग दोर्जे रबलिंग को आचार्य व्रजवल्लभ द्विवेदी शैवभारती, शिवलीला पाटिल को सिंधु सुभाष मातृशक्ति सम्मान, कवि दमदार बनारसी को जयदेव हिंदी साहित्य सम्मान और डॉ. आनंद कुमार जैन को संपादकाचार्य सम्मान दिया गया। डॉ. चंद्रशेखर शिवाचार्य महास्वामी ने कहा कि भक्ति और शक्ति एक ही सिक्के के दो पहलू हैं। जहां शक्ति ईश्वर से संसार की ओर प्रवाहित होती है, वहीं भक्ति मनुष्य को ईश्वर की ओर ले जाती है। डॉ. मल्लिकार्जुन विश्वाराध्य शिवाचार्य ने कहा कि सभी पूजा स्थल ईश्वर के घर हैं। अभंग गाथा और ऊर्जा संसाधन व पर्यावरण ग्रंथ का विमोचन किया।
इसके पूर्व मठ में डॉ. चंद्रशेखर शिवाचार्य महास्वामी एवं डॉ. मल्लिकार्जुन विश्वाराध्य ने वीर शैव संप्रदाय के ध्वजारोहण किया। वेदांत शास्त्रार्थ में स्वप्रकाशकत्व विचार: पर विद्यार्थियों में शास्त्रार्थ किया। संगीत संध्या में बंगलूरू से आए कलाकारों ने भरतनाट्यम और लोक संगीत से भगवान शिव की आराधना की। महाशिवरात्रि पर तीन हजार से अधिक अनुयायी सामूहिक ईष्टलिंग पूजा आदि अनुष्ठान करेंगे और शोभायात्रा निकालेंगे। संचालन विनोदराव पाठक ने किया। इस मौके पर डॉ. शिवानंद शिवयोगी, डॉ. बसवराज जयचंद्र स्वामी, शिवानंद स्वामी आदि रहे।