काशी में देवाधिदेव के विवाहोत्सव की गूंज गली और मोहल्लों में सुनाई दे रही है। शनिवार को विवाह की एक और रस्म निभाई गई। महिलाओं ने माता गौरा को मेहंदी रचाई और मंगल गीत गाया। टेढ़ीनीम स्थित पूर्व महंत के आवास से परंपरानुसार मेहंदी की थाल बाबा के ससुराल सारंगनाथ महादेव मंदिर सारनाथ भेजी गई। वहां ससुरालीजनों ने हल्दी अर्पित कर गौरा को मेहंदी लगाई। इस मांगलिक परंपरा के साथ काशी शगुनमय हो उठी।
महंत आवास से लोकाचार के साथ मेहंदी की सजी थाल जब सारंगनाथ पहुंची तो वहां उल्लास का माहौल था। ससुराल पक्ष की महिलाओं ने मंगल कलश और आरती की थाल के साथ मेहंदी का स्वागत किया। हल्दी अर्पित की। इसके बाद माता गौरा के हाथों में विधिवत मेहंदी रचाई गई। महिलाओं ने पारंपरिक लोकगीत गाई। ढोलक और मंजीरों की थाप पर थिरकते कदमों के साथ वातावरण भक्तिरस में डूब गया। आयोजक वाचस्पति तिवारी ने बताया कि महाशिवरात्रि पर टेढ़ीनीम स्थित पूर्व महंत के आवास पर विधि-विधान से विवाह की रस्में निभाई जाएंगी। शिव बरात समिति की ओर से शिव बरात निकाली जाएगी।
दंड और छत्र से निकलेगी बरात
अब सबकी निगाहें महादेव की बरात पर टिकी हैं। काशीपुराधिश्वर बाबा दंड और छत्र के सानिध्य में भव्य बरात निकलेगी, जिसमें हजारों श्रद्धालु शामिल होंगे। डमरुओं की नाद, शंखध्वनि और जयघोष के बीच बरात निकलेगी। पूर्व महंत के आवास पर बाबा का दंड और छत्र लाकर विवाह की रस्में निभाई जाएंगी।